शोभित रंजन
धनबाद जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) को पारदर्शी और जरूरतमंद परिवारों तक सीमित रखने के लिए जिला प्रशासन ने अपात्र राशन कार्डधारकों के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू किया है. उपायुक्त आदित्य रंजन के निर्देश पर खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने 23,612 राशन कार्ड निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. कार्रवाई के दायरे में आने वाले लाभुकों के साथ उनके परिवार के सभी सदस्यों के राशन कार्ड रद्द किये जायेंगे. जिला प्रशासन का कहना है कि यह कदम झारखंड लक्षित जन वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश, 2024 में निर्धारित एक्सक्लूजन क्राइटेरिया के अनुरूप उठाया जा रहा है.
21,996 आयकर दाता और 123 सरकारी कर्मी भी चिह्नित
जिला आपूर्ति विभाग की ओर से तैयार की गयी सूची के अनुसार 21996 आयकर दाता, 25 लाख रुपये से अधिक आय वाले 1493 तथा 123 सरकारी नौकरी करने वाले राशन कार्डधारक चिन्हित किये गये हैं. विभाग के की परफॉर्मेंस इंडिकेटर (केपीआइ) के आधार पर इन सभी को अपात्र श्रेणी में रखा गया है. प्रशासन का मानना है कि आर्थिक रूप से सक्षम लोगों द्वारा राशन योजना का लाभ लेने से वास्तविक गरीब परिवारों का अधिकार प्रभावित होता है.
परिवार के सभी सदस्यों के कार्ड भी होंगे निरस्त
उपायुक्त ने बताया कि जिन लाभुकों को अपात्र पाया गया है, उनके साथ उनके परिवार के सभी सदस्यों के राशन कार्ड भी निरस्त किये जायेंगे. जिला आपूर्ति विभाग ने इसके लिए प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू कर दी है. विभाग लगातार विभिन्न सरकारी डाटाबेस से लाभुकों के आंकड़ों का मिलान कर रहा है, ताकि केवल पात्र परिवारों को ही खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा सके.
जिला में 4.29 लाख से अधिक राशन कार्ड
सरकारी आंकड़ों के अनुसार धनबाद जिले में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत 4,29,887 राशन कार्ड जारी किये गये हैं. इनमें 3,95,681 प्राथमिकता परिवार (पीएचएच) तथा 34,206 अंत्योदय अन्न योजना (एएवाइ) के कार्ड शामिल हैं. इन राशन कार्डों के माध्यम से जिले के 18,71,094 लाभुकों को हर महीने रियायती दर पर खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है. इसके अलावा जिले में 30,758 श्वेत राशन कार्ड भी जारी किये गये हैं.
पारदर्शिता बढ़ाने और गरीबों का हक सुनिश्चित करने पर जोर
जिला प्रशासन का कहना है कि अपात्र लाभुकों के नाम हटने से पात्र गरीब परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ बेहतर तरीके से मिल सकेगा. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी विभिन्न सरकारी डाटाबेस से सत्यापन कर अपात्र राशन कार्डधारकों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि खाद्य सुरक्षा योजना का लाभ केवल वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक ही पहुंचे.
