ददई दुबे की प्रथम पुण्यतिथि पर सेमिनार, वक्ताओं ने कहा- झारखंड के विकास और श्रमिक हितों के लिए जीवनभर उठाई आवाज

झारखंड के विकास पुरुष स्व. चन्द्रशेखर दूबे उर्फ ददई दुबे की प्रथम पुण्यतिथि पर सेमिनार का आयोजन, उनके विकास कार्यों और श्रमिक हितों को याद किया गया.

झारखंड के सुप्रसिद्ध नेता एवं विकास पुरुष के रूप में पहचान रखने वाले स्व. चन्द्र शेखर दुबे उर्फ ददई दुबे की प्रथम पुण्यतिथि पर शुक्रवार को झारखंड के धनबाद जिले के झरिया स्थित राजीव गांधी मेमोरियल शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय में एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया. सेमिनार में शिक्षाविदों, राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने ददई दुबे के राजनीतिक, सामाजिक और विकास कार्यों को याद किया. वक्ताओं ने कहा कि गढ़वा से लेकर धनबाद तक विकास और श्रमिक हितों से जुड़े मुद्दों पर ददई दुबे ने लगातार आवाज उठायी. कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. निलेश कुमार सिंह ने की. इस दौरान उपस्थित लोगों ने स्व. ददई दुबे को श्रद्धा सुमन अर्पित कर उनके योगदान को याद किया. सेमिनार में शिक्षकों और शोधकर्ताओं ने उनके सार्वजनिक जीवन और विकास कार्यों पर शोध पत्र भी प्रस्तुत किए.

गढ़वा और धनबाद के विकास में योगदान को किया याद

सेमिनार को संबोधित करते हुए प्राचार्य डॉ. निलेश कुमार सिंह ने कहा कि झारखंड की राजनीति में ददई दुबे का नाम गढ़वा और धनबाद के विकास के संदर्भ में आज भी प्रमुखता से लिया जाता है. विधायक और सांसद के रूप में अपने सार्वजनिक जीवन के दौरान उन्होंने सड़क, शिक्षा, पेयजल, बिजली, सिंचाई और श्रमिक कल्याण जैसे बुनियादी मुद्दों को लगातार उठाया. उन्होंने कहा कि गढ़वा क्षेत्र में ददई दुबे के कार्यकाल के दौरान कई ग्रामीण सड़कों के निर्माण और मरम्मत के लिए प्रयास किए गए. पेयजल योजनाओं के विस्तार और विद्यालयों के विकास की दिशा में भी उन्होंने महत्वपूर्ण पहल की. क्षेत्र के दूर-दराज के गांवों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने के लिए वे लगातार सक्रिय रहे. वक्ताओं ने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ आम लोगों तक पहुंचाने और उनके क्रियान्वयन में तेजी लाने के लिए ददई दुबे ने जनप्रतिनिधि के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी. स्थानीय स्तर पर विकास से जुड़े मुद्दों को सरकार और संबंधित विभागों के समक्ष उठाना उनकी राजनीतिक कार्यशैली का अहम हिस्सा था.

कोयला मजदूरों के अधिकारों के लिए उठाते रहे आवाज

धनबाद में ददई दुबे की पहचान एक प्रभावशाली श्रमिक नेता के रूप में भी रही. कोयला उद्योग से जुड़े कर्मचारियों और मजदूरों के वेतन, सुरक्षा, सामाजिक सुविधाओं और अधिकारों से जुड़े मामलों को उन्होंने विभिन्न मंचों पर प्रमुखता से उठाया. श्रमिक संगठनों में सक्रिय भूमिका के कारण उन्हें मजदूर हितैषी नेता के रूप में जाना जाता था. वक्ताओं ने कहा कि कोयला क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों की समस्याओं को लेकर ददई दुबे हमेशा मुखर रहे. श्रमिकों के अधिकार और बेहतर कार्य परिस्थितियों के मुद्दे उनके सार्वजनिक जीवन की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहे.

'झारखंड के सच्चे विकास पुरुष थे ददई दुबे'

महाविद्यालय के सचिव सह निदेशक डॉ. आरएन चौबे ने अपने संदेश में कहा कि स्व. ददई दुबे झारखंड के सच्चे विकास पुरुष थे. उनके द्वारा किए गए विकास कार्यों के कारण आज भी आम जनता उनकी कमी महसूस करती है. उन्होंने कहा कि ददई दुबे ने राजनीति को जनसेवा का माध्यम बनाया और अपने सार्वजनिक जीवन में आम लोगों की समस्याओं को प्राथमिकता दी. उनके कार्य और विचार आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बने रहेंगे.

कांग्रेस नेताओं और शिक्षकों ने अर्पित किए श्रद्धा सुमन

सेमिनार में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता किशोर जी, भोला सिंह, राजीव कुमार पाण्डेय, एहसान खान, अनूप पांडेय, प्रमोद कुमार और मुख्तार खान ने स्व. ददई दुबे को श्रद्धा सुमन अर्पित किए. वक्ताओं ने उनके राजनीतिक और सामाजिक जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे. इस अवसर पर एमएड विभागाध्यक्ष डॉ. अरविंदर कौर, कार्यालय प्रभारी शुभ्र छाया पांडेय, सह प्रभारी इमरान हुसैन, शाहीन प्रवीण, सहायक प्राध्यापक सत्य प्रकाश मिश्र, डीएलएड विभागाध्यक्ष डॉ. अल्बिना कछप, डॉ. सिम्पल, शबनम प्रवीण, डॉ. अमिता कुमारी, डॉ. रंजू कुमारी और सहायक प्राध्यापक जया कुमारी ने शोध पत्र प्रस्तुत किए. इसके अलावा पुस्तकालय प्रभारी सरोज कुमार सिन्हा, सह प्रभारी हरे राम और अविनाश चौबे ने भी सेमिनार में अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया. शोध पत्रों के माध्यम से ददई दुबे के राजनीतिक जीवन, विकास कार्यों और श्रमिक हितों के लिए किए गए प्रयासों पर प्रकाश डाला गया.

सत्य प्रकाश मिश्र ने किया कार्यक्रम का संचालन

कार्यक्रम का संचालन सहायक प्राध्यापक सत्य प्रकाश मिश्र ने किया. वहीं, डीएलएड विभागाध्यक्ष डॉ. अल्बिना कछप ने धन्यवाद ज्ञापन किया. सेमिनार के समापन पर उपस्थित लोगों ने स्व. ददई दुबे के योगदान को याद करते हुए उनके विचारों और जनसेवा की भावना को आगे बढ़ाने पर जोर दिया.


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लेखक के बारे में

Author: Umesh singh

Published by: Kumarvishwat Sen

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