SAIL Biometric Dispute, धनबाद (संदीप की रिपोर्ट): बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम को लेकर झारखंड मजदूर संघर्ष संघ (किरीबुरू) और सेल (SAIL) प्रबंधन के बीच चल रहा विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है. केंद्र सरकार औद्योगिक अधिकरण (CGIT) कोर्ट, धनबाद में 14 मई को इस मामले की महत्वपूर्ण सुनवाई संपन्न हुई. जहां प्रबंधन ने इस प्रणाली को अनुशासन के लिए जरूरी बताया, वहीं यूनियन ने इसे लागू करने की कानूनी प्रक्रिया को चुनौती दी है.
NJCS की कानूनी स्थिति पर प्रहार
सुनवाई के दौरान यूनियन ने अपने लिखित प्रतिउत्तर में एनजेसीएस (NJCS) कमेटी और सेल प्रबंधन पर कड़े कानूनी सवाल खड़े किए. संगठन का तर्क है कि NJCS कोई पंजीकृत फोरम नहीं है, इसलिए वह स्टैंडिंग ऑर्डर (Standing Order) में बदलाव करने का अधिकार नहीं रखता. नियमों के अनुसार, स्टैंडिंग ऑर्डर में कोई भी परिवर्तन केवल त्रिपक्षीय फोरम (प्रबंधन, सरकार और मान्यता प्राप्त संगठन) के माध्यम से ही संभव है. किरीबुरू खदान में वर्तमान में कोई मान्यता प्राप्त ट्रेड यूनियन नहीं है, जिसे प्रबंधन ने स्वयं एएलसी (ALC) कोर्ट में स्वीकार किया है.
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अदालत में तीखी बहस
प्रबंधन की ओर से अधिवक्ता बी.डी. वर्मा ने पक्ष रखते हुए कहा कि बायोमेट्रिक प्रणाली का विरोध ‘ड्यूटी से बचने की मानसिकता’ को दर्शाता है. इस पर यूनियन के महामंत्री राजेंद्र सिंधिया और उनके अधिवक्ताओं ने पलटवार करते हुए कहा कि मामला हाजिरी का नहीं, बल्कि श्रम कानूनों को कमजोर करने के प्रयास का है. यूनियन ने स्पष्ट किया कि उन्हें तकनीक से आपत्ति नहीं है, बल्कि इसे ‘औद्योगिक रोजगार स्थायी आदेश अधिनियम’ के तहत कानूनी रूप से लागू किया जाना चाहिए.
अगली सुनवाई में पेश होंगे साक्ष्य
यूनियन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सोमेंद्र नाथ घोष, महामंत्री राजेंद्र सिंधिया, संयुक्त महामंत्री सुनील कुमार पासवान सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे. अब अगली सुनवाई में दोनों पक्ष अपने-अपने दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत करेंगे. यूनियन का दावा है कि स्टैंडिंग ऑर्डर श्रमिकों को शोषण से बचाने का एकमात्र कानूनी माध्यम है और इसके साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ स्वीकार नहीं की जाएगी.
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