बीबीएमकेयू में यूजी सत्र 2026-30 के नामांकन का अंतिम दौर चल रहा है, पर उपलब्ध सीटों की तुलना में दाखिले का आंकड़ा संबद्ध कॉलेजों के लिए बहद खराब है. विश्वविद्यालय के 13 अंगीभूत, एक अल्पसंख्यक और 22 संबद्ध कॉलेजों की करीब 42 हजार सीटों के एवज में अब तक 13,613 विद्यार्थियों ने नामांकन लिया है. सबसे चिंताजनक स्थिति कुछ संबद्ध कॉलेजों की है, जहां दाखिले का आंकड़ा दहाई तक सिमट गया है.
आठ संबद्ध कॉलेजों में 100 से कम दाखिले
22 संबद्ध कॉलेजों में से आठ ऐसे हैं, जहां अब तक 100 विद्यार्थी भी नामांकित नहीं हुए हैं. मेहंदी बाउरी डिग्री कॉलेज, चंदनकियारी में सबसे कम सिर्फ दो विद्यार्थियों ने दाखिला लिया है. एनपी सांध्यकालीन स्नातक महाविद्यालय में 32, बोकारो थर्मल सांध्यकालीन डिग्री कॉलेज में 35, पीएनएम कॉलेज गोमो में 40, तैयब मेमोरियल इवनिंग डिग्री कॉलेज में 42, तेनुघाट महाविद्यालय में 45, शमशुल हक मेमोरियल इवनिंग डिग्री कॉलेज में 58 और जेएसएम कॉलेज, फुसरो में 90 नामांकन हुए हैं.
संबद्ध महाविद्यालयों में सर्वधिक नामांकन
एसएस कॉलेज, चास में सर्वाधिक 919 नामांकन हुआ है. केएसजीएम कॉलेज, निरसा में 365, डीएवी महिला कॉलेज, कतरास में 280, राजगंज डिग्री कॉलेज में 279 और डिग्री कॉलेज बाघमारा में 278 विद्यार्थियों ने दाखिला लिया है. सभी 22 संबद्ध कॉलेजों को मिलाकर 4,382 नामांकन हुए हैं.
अंगीभूत कॉलेजों की स्थिति बेहतर
13 अंगीभूत कॉलेजों में कुल 8,290 विद्यार्थियों ने नामांकन लिया है. आरएस मोर कॉलेज, गोविंदपुर 1,267 दाखिले के साथ सबसे आगे है. कतरास कॉलेज में 1,001, पीके राय मेमोरियल कॉलेज में 948, बीएसके कॉलेज मैथन में 896 और एसएसएलएनटी महिला कॉलेज में 815 नामांकन हुए हैं.
वहीं, डिग्री कॉलेज टुंडी में सबसे कम 137 विद्यार्थियों ने दाखिला लिया है. आरएसपी कॉलेज झरिया में 261, डिग्री कॉलेज गोमिया में 406, सिंदरी कॉलेज में 420, केबी कॉलेज बेरमो में 433, बीएस सिटी कॉलेज में 525, डिग्री कॉलेज झरिया में 533 और चास कॉलेज में 648 नामांकन हुए हैं.
अकेले गुरुनानक कॉलेज में 941 दाखिले
बीबीएमकेयू के एकमात्र अल्पसंख्यक कॉलेज गुरुनानक कॉलेज में 941 विद्यार्थियों ने नामांकन कराया है. यह विश्वविद्यालय के कुल दाखिलों का करीब 6.91 प्रतिशत है. वहीं अंगीभूत कॉलेजों की हिस्सेदारी करीब 60.90 प्रतिशत है.
सीयूइटी से बढ़े विकल्प
शिक्षाविदों के अनुसार सीयूइटी के विस्तार से विद्यार्थियों के सामने देशभर के केंद्रीय व अन्य विश्वविद्यालयों में प्रवेश के विकल्प बढ़े हैं. बीबीएमकेयू के मनोविज्ञान विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ आरएस यादव के अनुसार पहले धनबाद और आसपास के परिवार खासकर बेटियों को स्थानीय कॉलेजों में पढ़ाना पसंद करते थे.
अब अभिभावकों की सोच बदली है और वे बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों में भी भेज रहे हैं. स्थानीय संबद्ध कॉलेजों में कम नामांकन को इसी बदलते शैक्षणिक रुझान से जोड़कर देखा जा रहा है.
