धनबाद : भारत प्रलय का पुजारी नहीं, निर्माण का देश है. यह बात बीएचयू के संस्थापक पंडित मदन मोहन मालवीय ने वर्षों पूर्व कही थी. लेकिन, यह आज भी पूरी तरह प्रासंगिक है. ये बातें सिंफर के निदेशक सह बीएचयू एल्युमिनी एसोसिएशन धनबाद-आसनसोल चैप्टर के अध्यक्ष डॉ पीके सिंह ने कही.
वह सिंफर ऑडिटोरियम में काशी हिंदू विश्वविद्यालय एल्युमिनी एसोसिएशन के धनबाद -आसनसोल चैप्टर के तत्वावधान में रविवार को आयोजित पूर्ववर्ती छात्र सम्मेलन में ‘महामना की प्रासंगिकता’ पर संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे.
डॉ सिंह ने कहा आज पूरी दुनिया भारत का लोहा मान रही है. भारत ने दुनिया को हमेशा नयी दिशा दी है. आइआइटी आइएसएम के प्रो इंद्रमणि मिश्र ने पूर्व की घटनाओं का जिक्र किया और महामना द्वारा भारत के विकास में किये गये सहयोगों पर प्रकाश डाला.
भारत का प्रथम खनन तकनीकी संस्थान खोला व विश्व का प्रथम सिलीकेट टेक्नोलाॅजी पर विभाग खोला जो कि उनकी भविष्य के प्रति सकारात्मक सोच को दर्शाता है. सिंफर के पूर्व निदेशक डॉ त्रिभुवन नारायण सिंह ने कहा अंग्रेज भारत को शिक्षित करना चाहते थे, ताकि उन्हें क्लर्क बना सकें. डॉ मालवीय ने बीएचयू में तकनीकी शिक्षा की शुरुआत की.
आइआइटी आइएसएम के प्रो प्रमोद पाठक ने कहा कि मालवीय जी ने कहा था कि औद्योगिक विकास से मानव विकास हो सकता है, किंतु चरित्र निर्माण से ही राष्ट्र की प्रगति हो सकती है. यह आज भी सौ फीसदी सच है. कोषाध्यक्ष डॉ सिद्धार्थ सिंह ने पूरे वर्ष का लेखा जोखा प्रस्तुत किया. सचिव अशोक कुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया. कार्यक्रम का संचालन टीबी सिंह ने किया. समारोह में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुआ.
