अभय कुमार, धनबाद : छत्तीसगढ़, राजस्थान व मध्य प्रदेश में कांग्रेस की जीत ने धनबाद के कांग्रेसियों में टिकट की चाहत और बढ़ा दी है. इसे लेकर निकट भविष्य में नेताओं का अंदरूनी कलह और बढ़ सकता है. फिलहाल आसन्न लोकसभा चुनाव को टारगेट कर अंदर-अंदर शह-मात का खेल चल रहा है.
एक-दूसरे की छवि बिगाड़ने, शिकस्त देने की कोशिश चल रही है. गुटबाजी चरम पर है. धनबाद में लोक सभा टिकट के कई दावेदार हैं. कई बाहर से आकर भी दावेदारी कर रहेे हैं. अालोचक ‘इसे गाछे कटहल ओठे तेल की’ की उक्ति चरितार्थ करना बतलाते हैं. पार्टी के कई लोग इन दिनों इस जुमले से हकीकत बयां कर रहे हैं : कांग्रेसी हूं, टिकट के लिए कुछ भी करूंगा.
विपक्ष की भूमिका में अप्रभावी
सत्ता से दूर होने के बाद भी धनबाद में ‘कांग्रेसी कल्चर’ में कोई बदलाव नहीं दिखा. इस दौरान धनबाद-चंद्रपुरा रेल लाइन का बंद होना, धनबाद से खुलने व गुजरने वाली 19 जोड़ी ट्रेनों का बंद होना, धनबाद से हावड़ा-नयी दिल्ली दुंरतो ट्रेन का छिनना, बकाया बिजली बिल के लिए जब-तब डीवीसी द्वारा घंटों लोड शेडिंग कर देना, जल संकट, धनबाद के लिए घोषित ट्रॉमा सेंटर का छीन लिया जाना, पीएमसीएच में एमबीबीएस की 100 सीटों को घटा कर 50 करना, धनबाद में एयरपोर्ट का मामला ठंडे बस्ते में चले जाना जैसे मसले सामने आये.
लेकिन पार्टी ने रस्मअदायगी भर आंदोलन किये. जनता के साथ पहले की तरह दूरी बनी हुई है. संवाद कायम नहीं हो सका है. कांग्रेसियों का एकमात्र इश्यू अभी भी लोकसभा का टिकट बना हुआ है.
दावेदारों की कतार
धनबाद में लोकसभा के टिकट के दर्जन भर दावेदार हैं. इनमें पूर्व मंत्री मो. मन्नान मल्लिक, राजेंद्र प्रसाद सिंह, ददई दूबे, अजय कुमार दूबे, विजय कुमार सिंह, कांग्रेस सोशल मीडिया के स्टेट को-ऑर्डिनेटर मयूर शेखर झा, केके ग्रुप के चेयरमैन रवि चौधरी, झारखंड पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक कुमार सिंह, प्रदेश कांग्रेस मीडिया सेल के प्रमुख राजेश ठाकुर, जिला कांग्रेस अध्यक्ष ब्रजेंद्र प्रसाद सिंह शामिल हैं.
मयूर शेखर झा धनबाद व बोकारो जिला में अपनी सक्रियता दो साल से बनाये हुए हैं. टिकट को लेकर सबका अपना-अपना खेमा है. खेमेबाजी चल रही है.
आलाकमान करेगा फैसला
कांग्रेस देश की सबसे पुरानी व अनुशासित पार्टी है. पार्टी को मजबूत बनाने के लिए सबको जमीन पर कार्य करना है. लोकसभा हो या विधानसभा चुनाव, टिकट का फैसला पार्टी अलाकमान ही करेगा. पार्टी में अनुशासनहीनता किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जायेगी.
अजय कुमार, अध्यक्ष, झारखंड प्रदेश कांग्रेस
आलाकमान करेगा फैसला
कांग्रेस देश की सबसे पुरानी व अनुशासित पार्टी है. पार्टी को मजबूत बनाने के लिए सबको जमीन पर कार्य करना है. लोकसभा हो या विधानसभा चुनाव, टिकट का फैसला पार्टी अलाकमान ही करेगा. पार्टी में अनुशासनहीनता किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जायेगी.
अजय कुमार, अध्यक्ष, झारखंड प्रदेश कांग्रेस
भारी पड़ सकती है कांग्रेस को गुटबाजी
कांग्रेस को यह गुटबाजी 2019 लोकसभा चुनाव में भारी पड़ सकती है. वर्ष 2004 अाम चुनाव के बाद कांग्रेस को यहां सफलता नहीं मिली है. तब कांग्रेस उम्मीदवार ददई दूबे ने लगातार चार बार सांसद रही प्रो.
रीता वर्मा को हराकर सीट पर कब्जा जमाया था. वर्ष 1989 से ही कांग्रेस धनबाद सीट पर लगातार हार रही थी. 2004 के चुनाव में ददई दूबे को तीन लाख 55 हजार 499 वोट, जबकि प्रो. रीता वर्मा को दो लाख 36 हजार 121 वोट मिले थे.
अभी धनबाद में दो टर्म से भाजपा के पशुपति नाथ सिंह सांसद हैं. वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के पीएन सिंह ने तत्कालीन सांसद चंद्रशेखर दूबे को पराजित किया था. पीएन सिंह को दो लाख 60 हजार 521 व ददई दूबे को दो लाख दो हजार 474 वोट मिले थे. दूबे के खिलाफ धनबाद में कांग्रेस का एक बड़ा तबका विरोध में था.
इंटक की गुटीय राजनीति व कोल कारोबार से जुड़े बड़े कारोबारी ने मोटी रकम खर्च की थी. ददई दूबे का विरोध करने वाले एक वर्ग विशेष के लोग ज्यादा थे. पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने ददई दूबे की जगह कांग्रेस के अजय दूबे को उम्मीदवार बनाया.
ददई दूबे कांग्रेस छोड़ टीएमसी से चुनाव लड़े. इस बार भी भाजपा के पशुपतिनाथ सिंह जीते. कांग्रेस के एक बड़े तबके ने साथ रहकर अजय दूबे के खिलाफ काम किया था. मोदी लहर के बावजूद अजय दूबे ढाई लाख से ज्यादा मत लाने में सफल रहे.
पीएन सिंह को पांच लाख 43 हजार 491 वोट व अजय दूबे को दो लाख 50 हजार 537 वोट मिले थे. तीसरे स्थान पर मासस के आनंद महतो को एक लाख 10 हजार व चौथे स्थान पर रहे झाविमो के समरेश सिंह को 90 हजार 926 वोट मिले थे. तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार ददई दूबे को लगभग 30 हजार वोट मिले थे.
