ई-ऑक्शन बंदी का असर. नुकसान की भरपाई अब लिंकेज होल्डरों से करने की तैयारी
पहली बार रंगदारी देने की बजाय हार्डकोक उद्यमियों के एसोसिएशन ने खोला मोर्चा
धनबाद : कोयला मंत्रालय के निर्देश पर कोल इंडिया की अनुषंगी कंपनी बीसीसीएल में ई-ऑक्शन पर रोक के बाद धनबाद जिले के बाघमारा कोयलांचल में रंगदारों के सिंडिकेट में हड़कंप मचा हुआ है. मैनुअल लोडिंग में कार्यरत मजदूरों की आड़ में रंगदारी वसूली में लगे लोगों ने ई-ऑक्शन बंद होने से हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए लिंकेज व फॉरवर्ड ऑक्शन से कोयला खरीद करनेवाले व्यवसायियों के कोयला उठाव पर प्रति टन लगनेवाले रंगदारी टैक्स में बढ़ोतरी का फरमान जारी किया है.
हालांकि इस बार हार्डकोक व्यवसायियों के संगठन इंडस्ट्री एंड कॉमर्स एसोसिएशन ने ‘रंगदारों के सरदार’ के सामने घुटने टेकने की बजाय खिलाफ में मोर्चा खोल दिया है. पूरे कोयलांचल के कोयला व्यापारियों में यह चर्चा का विषय है.
क्या है मामला : बताते हैं कि बाघमारा कोयलांचल स्थित बीसीसीएल की मुराइडीह, शताब्दी, नदखरकी, बेनीडीह, जमुनिया, जोगीडीह, महेशपुर, खरखरी, ब्लॉक-फोर, कनकनी व चैतुडीह आदि कोलियरी में पिछले कुछ वर्षों से पूरी तरह से रंगदारों के एक सिंडिकेट का कब्जा है.
जो भी लिंकेज होल्डर व्यवसायी इन कोलियरियों से कोयला की खरीदारी करते हैं, उन्हें ‘रंगदारों के सिंडिकेट’ को प्रतिटन 650 रुपये की रंगदारी देनी पड़ती है. रंगदारों का यह सिंडिकेट ई-ऑक्शन के तहत होनेवाली कोयला की खरीद-बिक्री में भी मोटी रकम की वसूली करता रहा है. इधर, ई-ऑक्शन बंद हो गया है. इसका सीधा असर ‘रंगदारों के सिंडिकेट’ की अवैध वसूली से होनेवाली मोटी कमाई पर पड़ा है.
ई-ऑक्शन बंदी के नुकसान की भरपाई को लेकर रंगदारों के सिंडिकेट के ‘सरदार’ ने रंगदारी की रकम 650 से बढ़ा कर दोगुना यानी 1250 रुपये करने का फरमान जारी कर दिया. इससे कोयला व्यवसायियों में उबाल है. इंडस्ट्री एंड कॉमर्स एसोसिएशन ने बैठक कर रंगदारी टैक्स में बढ़ोतरी तो दूर वर्तमान में लग रहे रंगदारी टैक्स भी अब देने से साफ इनकार कर दिया है.
लिंकेज होल्डरों से 21.25 करोड़ की रंगदारी वसूली
बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों से बाघमारा कोयलांचल स्थित बीसीसीएल की एक दर्जन से अधिक कोलियरियों पर ‘रंगदारों के सिंडिकेट’ का कब्जा है.
यहां से कोयला उठाव के लिए लिंकेज होल्डरों को प्रतिटन 650 रुपये की रंगदारी देनी पड़ती है. इसमें करीब 250 रुपये का बंटवारा लोडिंग मजदूर, कांटा, डिस्पैच, प्रोजेक्ट ऑफिसर, सेल्स अधिकारी, सीआइएसएफ के बीच होता है. शेष 400 रुपये ‘रंगदारों के सिंडिकेट’ के ‘सरदार’ की जेब में चले जाते हैं.
इस हिसाब से यदि जनवरी से अक्तूबर 2018 तक लिंकेज के तहत कोयला उठाव के दौरान व्यवसायियों द्वारा किये जानेवाले भुगतान पर गौर करें, तो 21.25 करोड़ (21,25,20,000 रुपये) की राशि होती है. यह राशि सीधे तौर पर ‘रंगदारों के सिंडिकेट’ के ‘सरदार’ की जेब में गयी है. बिना किसी रोक-टोक के इतनी बड़ी राशि की वसूली की पूरे क्षेत्र में चर्चा रही है.
माह ऑफर (%में) रंगदारी वसूली (")
जनवरी 39,900 टन (19%) 1,59,60,000
फरवरी 37,800टन (18 %) 1,51,20,000
मार्च 25,200टन (12%) 1,00,80,000
अप्रैल 37,800टन (18%) 1,51,20,000
मई 27,300 टन (13%) 1,09,20,000
जून 58,800 टन (28%) 2,35,20,000
जुलाई 56,700 टन (27%) 2,26,80,000
अगस्त 60,900 टन (29%) 2,43,60,000
सितंबर 1,02,900 टन (49%) 4,11,60,000
अक्तूबर 84,000 टन (40%) 3,36,00,000
कुल 5,31,300 टन (253%) 21,25,20,000
(नोट-01 फीसदी का मतलब है 2100 टन).
किस कोलियरी से कितनी वसूली
महेशपुर व खरखरी कोलियरी में लिंकेज होल्डरों से 650 रुपये लोडिंग के नाम पर लिये जाते हैं. इसमें 200 रुपये प्रतिटन लोडिंग मजदूरों को दिया जाता है, जबकि 450 रुपये रंगदारों के सिंडिकेट को चला जाता है.
नदखरकी, बेनीडीह, जमुनियां कोलियरी में लिंकेज होल्डरों से 650 रुपये लोडिंग के नाम पर लिये जाते हैं. इसमें 230 रुपये प्रतिटन लोडिंग मजदूरों को दिया जाता है, जबकि 420 रुपये रंगदारों के सिंडिकेट को चला जाता है.
शताब्दी, मुराइडीह फुलारीटांड़ में 650 की वसूली कर मैनुअल लोडिंग मजदूरों को 250 रुपये प्रतिटन मजदूरी दी जाती है. शेष 400 रुपये रंगदारों के सिंडिकेट को चला जाता है.
