धनबाद: अनुकंपा पर नियुक्त हुए 18 शिक्षकों ने अपनी नियुक्ति को सही ठहराया है. उनका कहना है कि हमारी नियुक्ति में किसी कानून का उल्लंघन नहीं हुआ. मानव संसाधन विकास विभाग, झारखंड सरकार के संकल्प संख्या 129 (15 जनवरी 2008) के प्रावधान के तहत नियुक्ति हुई.
डीएसइ कार्यालय के ज्ञापांक 2279 एवं 4186 (12 जून एवं 24 दिसंबर 2012) द्वारा जिला अनुकंपा समिति ने अनुशंसा की. साथ ही जिला स्थापना समिति में लिये गये निर्णय के तहत अप्रशिक्षित सहायक शिक्षक के पद पर बहाली हुई. मानव संसाधन विकास विभाग के संकल्प संख्या 129 (15 जनवरी 2008) का संशोधन विभागीय संकल्प 945 (13 मई 2013) द्वारा किया गया और हम सभी अभ्यर्थियों की बहाली 13 मई 2013 के पहले हुई थी. पीड़ित शिक्षकों ने यह भी कहा है कि उन्हें डीसी एवं डीएसइ पर पूरा भरोसा है कि उनके साथ गलत नहीं होगा. ऐसा नहीं होने पर न्यायालय की शरण में जा सकते हैं.
उच्च न्यायालय में मिली जीत
पीड़ित शिक्षकों ने उच्च न्यायालय के एक निर्णय डब्ल्यूपी (एस) नंबर 1897 ऑफ 2013 का हवाला दिया. कहा कि कोडरमा जिले में अनुकंपा पर बहाल अभ्यर्थी ज्ञापांक 1334 (20 सितंबर 2012) को भी विभागीय संकल्प 129 के तहत बहाल किया गया था, लेकिन डीएसइ कोडरमा ने ज्ञापांक 201 (7 मार्च 2013) में इन्हें अन्य पद पर योगदान करने का आदेश दिया. इस पर अभ्यर्थी न्यायालय की शरण में गये थे. इसमें उच्च न्यायालय ने सहायक शिक्षक पद पर हुई नियुक्ति को वैध ठहराते हुए डीएसइ कोडरमा के आदेश को निरस्त कर दिया.
क्या है मामला
जिला अनुकंपा समिति, धनबाद की अनुशंसा पर 18 अप्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति को प्राथमिक शिक्षा निदेशक जितबाहन उरांव ने विभागीय नियम का हवाला देते हुए गलत ठहराया है. उन्होंने धनबाद उपायुक्त प्रशांत कुमार को पत्र लिखते हुए अनुकंपा समिति के उपरोक्त निर्णय पर पुर्नविचार करते हुए अन्य पदों पर नियुक्ति करने को कहा है.
