असमय बिजली कटौती का इंटक ने किया विरोध
धनबाद. कोयला नगर में असमय बिजली कटौती का इंटक बीसीसीएल कोयला भवन सचिव संतोष कुमार सिंह ने विरोध किया है. श्री सिंह ने कहा कि बिजली आपूर्ति विभाग मनमाने ढंग से बिजली की कटौती कर रहा है. जबकि पिछले दिनों सीएमडी के ओएसडी मुकेश कुमार के समक्ष वार्ता में तय हुआ था कि कोयला नगर में दिन के तीन से पांच बजे तक ही बिजली की कटौती की जायेगी. दिन में डीवीसी द्वारा शटडाउन किये जाने पर शाम में बिजली कटौती नहीं करने पर सहमति बनी थी.
सत्या राज
धनबाद : कोयलांचल के पूजा पंडालों में मनईटांड़ नवयुवक संघर्ष समिति मनईटांड़ का नाम अग्रणी रहता है. यहां का पंडाल और प्रतिमा देखने दूर-दराज से भक्त आते हैं. इस साल पाषाण युग की थीम पर पंडाल सज रहा है. आदि मानव का रहन सहन कैसा था-का दर्शन पंडाल में कराया जायेगा.
अंबे मां की प्रतिमा थर्मोकोल से बनायी गयी है. ऐसा दर्शाया जा रहा है जैसे कलाकार पत्थर पर मां की प्रतिमा तराशी गयी हो. गुफा रूपी पंडाल का मुख्य द्वार मानव की खोपड़ी जैसा होगा. पंडाल में प्रवेश करने के लिए मानव के मुंह से गुजरना होगा. आंख से भयानक अजगर निकलता दिखेगा. गुफा में पूरी तरह से पाषाण युग का दृश्य होगा. सांप- बिच्छू के साथ मानव कैसे एक साथ रहते थे. आदि मानव कैसे शिकार करता था. पत्थर से आग पैदा किया करता था वगैरह-वगैरह.
ये हैं सक्रिय सदस्य : अध्यक्ष परमिंदर सिंह, सचिव अभिमन्यु सिंह, संयुक्त सचिव शैलेश सिंह, मनोज सिंह, जितेंद्र सिंह, सहायक सचिव अशोक नारायण, भरत भगत, अजय प्रसाद, उपाध्यक्ष संजय सिन्हा, कोषाध्यक्ष कुंदन साव, बीरवल, पवन सिंह, संजू यादव, मिट्ठू सिंह, संयुक्त कोषाध्यक्ष विशाल, अजित, रणधीर, नागेश्वर, सुरेश, गुड्डू, संरक्षक पंकज सिंह राठौर, नरेंद्र सिंह, पंकज चौरसिया, आर्ट डायरेक्टर श्यामल सेन, मुख्य सलाहकार राजेश सिंह, राकेश मिश्रा, सोनू सिंह, दीपक दा, अजय साव, मोना अधिकारी, समन्वयक पप्पू साव, दीपक सिन्हा, विकास, गोविंद, आदि.
गुफा से शुरू किया था, गुफा से खत्म : आर्ट डायरेक्टर श्यामल सेन लेंगे संन्यास
नवयुवक संधर्ष समिति के आर्ट डायरेक्टर श्यामल सेन कहते हैं इस साल पूजा का 46वां साल है. पहला पंडाल गुफा से प्रारंभ हुआ था मेरा अंतिम पंडाल भी गुफा से बन रहा है. अब स्वास्थ्य इजाजत नहीं दे रहा है. बिजली-पानी की परेशानी प्रति दिन कोयलांचलवासी झेल रहे हैं. हमें काम करने में काफी परेशानी हो रही है. बिजली रहती नहीं, कलाकार कैसे काम करेंगे. समिति इसी तरह नयी थीम लेकर काम करती रहे, यही हमारी शुभकामना है.
सबके सहयोग से बनता है पंडाल
यहां की सबसे बड़ी खासियत है कि पंडाल और मूर्ति भावना आर्ट के कलाकारों द्वारा तैयार किया जाता है. कमेटी के सदस्य श्रमदान कर सजावट एवं अन्य कार्य करते हैं. यहां पूजा 1972 में शुरू हुई. कमेटी के फाउंडर मेंबर एवं बहुमुखी प्रतिभा के धनी श्यामल सेन कहते हैं-बेलवरन के साथ पूजा प्रारंभ हो जाती है. सप्तमी से नवमी तक मां का भोग भक्तों के बीच वितरित किया जाता है. दशमी को सिंदूर खेला के साथ मां को विदाई दी जाती है. भक्तगण अपने कंधों पर मां की प्रतिमा को उठाकर छठ तालाब में विसर्जित करते हैं. पूजा में चार दिन तक स्वयंसेवक पूरी तरह मुस्तैद रहते हैं. भक्तों को कोई परेशानी न हो इसका खास ध्यान रखा जाता है.
