सारठ : लगभग 220 एकड़ क्षेत्र में फैले पथरड्डा पहाड़ की प्राकृतिक वादियों में बुधवार को चार वर्ष बाद एक बार फिर आस्था और प्रकृति का अनूठा संगम देखने को मिला. 16 सितंबर को पथरड्डा पहाड़ में बाबा पहाड़ ठाकुर एवं माता कुंडेश्वरी देवी की विधिवत पूजा-अर्चना की गयी. वर्षों पुरानी इस पूजा परंपरा का आयोजन किसी कारणवश पिछले चार वर्षों से नहीं हो पा रहा था. इस बार आसपास के ग्रामीणों ने आपसी सहयोग और आर्थिक सहयोग एकत्रित कर पूजा का आयोजन कराया.
प्रकृति और खेती-किसानी से जुड़ी मान्यता
ग्रामीणों के अनुसार, यह पूजा प्रकृति और खेती-किसानी से गहरा संबंध रखती है. मान्यता है कि जिस दिन पहाड़ पर बाबा पहाड़ ठाकुर और माता कुंडेश्वरी देवी की पूजा होती है, उस दिन बारिश अवश्य होती है. बुधवार को भी पूजा संपन्न होते ही बारिश शुरू हो गयी. इससे आसपास के किसानों में खुशी देखी गयी. बारिश होने से खेतों में खेती-बाड़ी के कार्य में सहयोग मिलता है.
प्राकृतिक परिवेश में होती है पूजा
पथरड्डा पहाड़ घने प्राकृतिक परिवेश से घिरा है. ग्रामीणों के मुताबिक, पहाड़ क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के जंगली जानवर और जीव-जंतु रहते हैं. बाबा पहाड़ ठाकुर और माता कुंडेश्वरी देवी को क्षेत्र की रक्षा करने वाली शक्ति के रूप में मानते हैं. यही कारण है कि पूजा को केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रकृति और ग्रामीण जीवन से जुड़ी परंपरा के रूप में भी देखा जाता है.
सड़क निर्माण की मांग
पूजा के दौरान विधायक प्रतिनिधि राहुल सिंह भी पहुंचे. मौके पर ग्रामीणों ने उनसे मुख्य सड़क से पथरड्डा पहाड़ तक सड़क निर्माण कराने का आग्रह किया. ग्रामीणों ने विधायक प्रतिनिधि को बताया कि सड़क नहीं रहने से पूजा स्थल तक पहुंचने में काफी परेशानी होती है.
इस वर्ष सड़क निर्माण का आश्वासन
ग्रामीणों को राहुल सिंह ने आश्वासन देते हुए कहा कि इस वर्ष सड़क निर्माण कराया जायेगा, ताकि किसी को भी यहां जाने में कोई परेशानी न हो.
सैकड़ों ग्रामीणों का रहा योगदान
पूजा आयोजन में पथरड्डा पंचायत के मुखिया नंदकिशोर तूरी, अधीर सिंह, अशोक राय, राहुल सिंह समेत सैकड़ों ग्रामीणों का महत्वपूर्ण योगदान रहा.
