मधुपुर. शहर के भेड़वा नावाडीह स्थित राहुल अध्ययन केंद्र में प्रगतिशील, जनवादी कवि केदारनाथ सिंह व बाम-जनवादी आंदोलन के पुरौधा ईएमएस नबूदीरिपाद की स्मृति दिवस पर याद किया गया. दोनों विभूतियों की तस्वीर पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किया गया. इस अवसर पर धनंजय प्रसाद ने कहा कि केदारनाथ सिंह देश के प्रमुख शिक्षण संस्थान जेएनयू के भारतीय भाषा केंद्र के अध्यक्ष पद से सेवानिवृत्त हुए. उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार व ज्ञान पीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. वे तीसरा सप्तक के कवियों को एकत्रित किया. जीवन के अंर्तविरोध के बीच समाज की विसंगतियों को जानते व पहचानते थे. जनसंघर्षों को स्वीकार करते हुए उसपर विश्वास व आस्था रखते थे. उन्होंने कहा कि नबूदीरिपाद भारतीय बाम-जनवादी के सर्वश्रेष्ठ नेताओं में से एक थे. देश में पहला गैर-कांग्रेसी सरकार केरल में उनके ही नेतृत्व में ही बनी थी. वे आधुनिक केरल के निर्माता थे. उन्होंने ही केरल को शिक्षा के क्षेत्र में भूमि सुधार, जन स्वास्थ्य व जन वितरण प्रणाली में एक नंबर पर ला खड़ा किया. केरल को देश में एक अलग पहचान बनायी. आज केरल देश का माॅडल बन गया है. वे एक प्रसिद्ध लेखक भी थे. उनकी प्रमुख रचनाएं हैं- द महात्मा एन्ड द इज्म, कान्फिलक्टस एंड क्ररिसिस, इंडियन प्लानिंग इन क्राइसिस, नेहरू द आरडिया, लेजी एंड प्रेक्टिस, हिस्ट्री ऑफ केरल कम्युनिस्ट पार्टी व हिस्ट्री ऑफ कम्युनिस्ट पार्टी आफ इंडिया फोर 1920 आदि है. इसी साल आज के ही दिन ईमानदार सत्ता के परिचायक हमारे बीच से कुछ कर गये थे. भला ऐसे विभूतियों को याद करना लाजिमी है. अन्य लोगों ने भी अपने विचार व्यक्त किया.
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