देवीपुर. एम्स देवघर में मंगलवार को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के सहयोग से सेंटर फॉर एडवांस्ड रिसर्च परियोजना के तहत सर्पदंश की रोकथाम और प्रबंधन को लेकर एक महत्वपूर्ण हितधारक परामर्श बैठक आयोजित की गयी, जिसमें विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने भाग लेते हुए सर्पदंश जैसी गंभीर समस्या से निपटने के उपायों पर विस्तृत चर्चा की. कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समुदाय में सर्पदंश के प्रति जागरूकता बढ़ाना, पीड़ितों को समय पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना और एक समन्वित बहु-क्षेत्रीय रणनीति तैयार करना रहा. इस दौरान एक व्यापक सामुदायिक-आधारित मॉडल प्रस्तुत किया गया, जिसके जरिये ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में भी प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया. बैठक में वन, कृषि, आपदा प्रबंधन, शिक्षा और जिला प्रशासन सहित कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल हुए. जिला उपायुक्त मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे. उन्होंने सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया. इस दौरान सर्पदंश प्रबंधन में आ रही चुनौतियों, संसाधनों की उपलब्धता, प्रशिक्षण की जरूरत और जन-जागरूकता अभियानों को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई. साथ ही प्रभावी क्रियान्वयन के लिए उपस्थित हितधारकों से सुझाव भी प्राप्त किए गए. अंत में यह निर्णय लिया गया कि सामूहिक प्रयासों और बेहतर समन्वय के जरिये सर्पदंश से होने वाली मौतों को कम करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जायेंगे. मौके पर निदेशक प्रो. (डॉ.) नितिन गंगाने, डॉ सुनील कुमार मौजूद थे.
एम्स में सर्पदंश से बचाव का बताया तरीका
एम्स देवघर में सर्पदंश रोकथाम पर हितधारक परामर्श को लेकर बैठक
