विभूतियों की तस्वीर पर माल्यार्पण कर अर्पित किये श्रद्धासुमन

पुण्यतिथि पर किये गये याद प्रेमचंद, लोकनायक जयप्रकाश नारायण व श्रीनिवास पानुरी

मधुपुर. शहर के भेड़वा नवाडीह स्थित राहुल अध्ययन केंद्र में लोकप्रिय उपन्यासकार प्रेमचंद, लोकनायक जयप्रकाश नारायण व खोरठा के अग्रदूत श्रीनिवास पानुरी को पुण्यतिथि पर याद किया गया. तीनों विभूतियों की तस्वीर पर माल्यार्पण कर लोगों ने श्रद्धासुमन अर्पित किया. इस अवसर पर धनंजय प्रसाद ने कहा कि प्रेमचंद कलम के सिपाही थे. प्रेमचंद राजसत्ता के नहीं लोकसत्ता के लेखक थे. वे पूंजीवाद की ही नहीं उसके पोषक साहित्य के भी आलोचक थे. प्रेमचंद सदैव सत्य और न्याय के पक्षधर थे. उन्होंने झूठ, पाखंड व अन्याय के विरुद्ध ही सृजन किया. भारतीय राजनीति में जो स्थान गांधी जी का है. वहीं स्थान साहित्य जगत में प्रेमचंद का है. प्रेमचंद साहित्य जगत के गांधी थे. वे साहित्य को राजनीति का पिछलग्गू नहीं, बल्कि मार्गदर्शन कराने वाला मशाल मानते थे. उन्होंने कहा कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण संपूर्ण क्रांति के स्वप्नदर्शी थे. जेपी व्यवस्था के खिलाफ युवाओं को गोलबंद कर आंदोलन किया था. उन्होंने कहा कि पानुरी जी खोरठा साहित्य के अग्रदूत थे. उन्होंने मुफलिसी की जिंदगी जीते सुरेश साहित्य, संस्कृति व समाज की सेवा की. अपने साहित्यिक जीवन में पचासेक पुस्तकों की रचना कर खोरठा साहित्य को समृद्ध किया. आज खोरठा साहित्य जिस मुकाम पर इसके पानुरी का अथक प्रयास रहा है. ऐसे विभूतियों को भला कैसे भूलाया जा सकता है. जिन्होंने साहित्य सेवा के लिए खुद की आहुति दिया हो. मौके पर अन्य लोगों ने भी अपने विचार व्यक्त किये.

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Published by: Balram

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