मधुपुर. शहर के भेड़वा नावाडीह स्थित राहुल अध्ययन केंद्र में प्रसिद्ध कवयित्री महादेवी वर्मा की जयंती व समाजसेवी रमणिका गुप्ता की पुण्यतिथि पर उन्हें याद किया गया. लोगों ने दोनों विभूतियों की तस्वीर पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किया. इस अवसर पर धनंजय प्रसाद ने कहा कि महादेवी वर्मा छायावाद के चार स्तंभों में से एक थी. वे आधुनिक मीरा व साहित्य सम्राज्ञी के नाम से जानी जाती है. उनकी कविता साहित्य की सबसे बड़ी शर्त्त पूरी करती है. उनकी वाणी सहज संवेद्य होने कारण लोकप्रिय हो जाती है. उनके गीत नारी के संपूर्ण जीवन को उनके अनेकों रूपों की बिंबों में साकार करती है. उनकी प्रमुख रचनाएं है. निसार, रश्मि, संध्यागीत, अग्निरेखा, मेरा परिवार स्मृति की रेखाएं, पथ के साथी, शृंखला की कड़ियां, दीपशिखा, अतीत के चलचित्र आदि है. उन्हें पद्म भूषण, पद्म विभूषण व ज्ञान पीठ सम्मान से सम्मानित किया गया. रमणिका गुप्ता दलित शोषित, पीड़ित, मजदूर, किसान, आदिवासी व महिलाओं को अधिकार दिलाने के लिए संघर्ष करने वाली सामाजिक कार्यकर्ता, कवयित्री, साहित्यकार व प्रखर लेखिका थी. पूरी उम्र सांप्रदायिक शक्तियों के खिलाफ लड़ने वाली व खुलकर संघर्ष करने वाली जुझारू महिला नेत्री भी थी. उन्होंने लम्बे समय संघर्ष व लेखन की है. उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन लोगों के लिए समर्पित कर दिया. निज घर प्रदेश, सांप्रदायिकता के बदलते चेहरे, आदिवासी स्वर नयी शताब्दी के संपादन किये. आदिवासी, दलित व स्त्री विमर्श, मजदूर शोषित पर दर्जनों पुस्तक लिखी. साथ ही छह काव्य संग्रह, चार कहानी संग्रह, तैंतीस विभिन्न भाषाओं पर साहित्यिक रचनाएं की. मौके पर अन्य लोगों ने भी अपने विचार को रखा.
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