राहुल अध्ययन केंद्र में साहित्यिक विभूतियों को अर्पित किये गये श्रद्धासुमन

मधुपुर: राहुल अध्ययन केंद्र में गूंजा पंत का साहित्यिक योगदान और पाल का संघर्ष

मधुपुर. शहर के भेड़वा नवाडीह स्थित राहुल अध्ययन केंद्र में कवि सुमित्रानंदन पंत की जयंती व स्वतंत्रता सेनानी विपिन चंद्र पाल की स्मृति दिवस पर उन्हें याद किया गया. उपस्थित लोगों ने दोनों विभूतियों की तस्वीर पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किया. मौके पर जलेस के प्रांतीय सह सचिव धनंजय प्रसाद ने कहा कि हिन्दी साहित्य में प्रकृति के सुकुमार कवि के नाम से जाने जाते सुमित्रानंदन पंत थे. वैसे तो वो शुरुआती दिनों में प्राकृतिक सौंदर्य व नारी स्वतंत्रता के पक्षधर कवि के रूप सामने आये. इस दौरान भाषा के समृद्ध, हस्ताक्षर व संवेदना की अनुभूति उनकी कृतियां चिंदबरम, उच्दवास, बीणा, गुंजन व लोकायतन आदि में परिलक्षित होता है. उनके 60 वर्षीय साहित्यिक यात्रा के तीन प्रमुख भागों में बांटकर देख सकते है. उन्हें 1916-1935 तक छायावाद, 1935 – 45 तक प्रगतिवाद काल कहते है. इस दरम्यान उनकी युगांत, गुणवाणी, ग्राम्या आदि काव्य संग्रह प्रकाशित हुई है. 1945 – 1977 के काल को अध्यात्मवाद के रूप में देखते है. उन्होंने गेय और अगेय दोनों में अपनी लेखन कला का लोहा मनवाया. साहित्य में उन्नत व उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें पद्मभूषण, ज्ञानपीठ व सोवियत रूस नेहरू सम्मान से सम्मानित किया गया है. उन्होंने कहा कि विपिनचंद्र पाल स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक, लेखक व प्रखर वक्ता थे. इसके अलावा अन्य लोगों ने भी अपने विचार व्यक्त किया. — कवि सुमित्रानंदन पंत की जयंती व स्वतंत्रता सेनानी विपिन चंद्र पाल की स्मृति दिवस पर किया गया याद

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Author: BALRAM

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