Deoghar News : चेक बाउंस के दोषी को एक साल की सजा

चेक बाउंस को लेकर परिवादी राकेश भारद्वाज की ओर से दर्ज कराये गये मामले में अभियुक्त बचनदेव मांझी को दोषी पाकर एक साल की सजा सुनायी. साथ ही 3.49 लाख रुपये मुआवजा के तौर पर परिवादी को मुहैया कराने का आदेश दिया.

देवघर. चेक बाउंस को लेकर परिवादी राकेश भारद्वाज की ओर से दर्ज कराये गये मामले में अभियुक्त बचनदेव मांझी को दोषी पाकर एक साल की सजा सुनायी. साथ ही 3.49 लाख रुपये मुआवजा के तौर पर परिवादी को मुहैया कराने का आदेश दिया. इसमें चेक की राशि भी शामिल है. मुआवजा के तौर पर आदेशित राशि का भुगतान अगर सजायाफ्ता नहीं करता है, तो अलग से तीन माह की सजा काटनी होगी. यह मुकदमा बैद्यनाथ लेन देवघर के रहने वाले राकेश भारद्वाज ने कोर्ट में दर्ज कराया था, जिसमें चेक बाउंस का आरोप लगाया गया था. दाखिल मुकदमा में कहा गया था कि एक दूसरे के बीच दोस्ती रहने के चलते आवश्यक खर्च के तौर पर 3.49 लाख रुपये लिया था एवं लौटाने का वादा किया था. बाद में परिवादी ने जब पैसों की मांग की तो आरोपित ने उक्त राशि का अलग-अलग चेक दिया, जो बाउंस हो गया. परिवादी ने वकालन नोटिस भेजा, फिर भी पैसे नहीं देने पर कोर्ट में केस किया. मामले की सुनवाई के दौरान परिवादी की ओर से तीन लोगों की गवाही दिलायी गयी और दोष सिद्ध करने में सफल रहा. अदालत में परिवादी एवं बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं की बहस सुनने के पश्चात आरोपित को दोषी करार दिया एवं उपरोक्त सजा सुनायी गयी. हाइलाइट्स 3.49 लाख रुपये भुगतान का भी दिया आदेश

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Published by: Falguni marik

विगत 32 वर्षों से प्रभात खबर में पत्रकारिता करते आ रहा हूं. विशेष तौर पर कोर्ट से संबंधित खबरों के अलावा श्रावणी विशेषांक -बिल्व पत्र में धार्मिक आलेख लेखन, दुर्गापूजा के अवसर पर निकाली गयी दुर्वाक्षत में धार्मिक लेख लिखने, सामयिक कॉलम कोर्ट कचहरी का चक्कर, क्राइम स्टोरी आदि लेखन का अनुभव है. साथ ही लोक भाषा खोरठा में कविता, कहानी लेखन का अनुभव है. झारखंड अधिविध परिषद रांची के वर्ग अष्टम के पाठ्यक्रम में तथा आचार्य विनोवा भावे विश्वविद्यालय में बीए की कक्षा के पाठ्यक्रम में कविता शामिल हो चुकी है. विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में कविताएं, कहानियां व आलेखों का भी प्रकाशन हो चुका है.

प्रभात खबर में विगत 32 वर्षों से पत्रकारिता का अनुभव. विशेष तौर पर अदालत की खबरों पर पकड़ है. इसके अलावा विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं पर आलेख छपते रहा है. बिल्व पत्र श्रावणी विशेषांक में धार्मिक आलेख, सामयिक कॉलम- कोर्ट कचहरी का चक्कर, क्राइम स्टोरी आदि लेखन करते रहे हैं. लोक भाषा खोरठा की जानकारी है एवं इनकी कविता झारखंड अधिविध परिषद में वर्ग अष्टम तथा बिनोवा भावे विश्वविद्यालय में बीए पाठ्यक्रम में शामिल है.

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