देवघर : नगर निगम के पदाधिकारी और कर्मचारियों ने 12 सितंबर की घटना समेत लगातार हो रहे कथित दुर्व्यवहार, धमकी, जातिसूचक व लैंगिक टिप्पणियों तथा प्रशासनिक कार्यों में अनुचित हस्तक्षेप के विरोध में 16 से 22 सितंबर तक शांतिपूर्ण पेन-डाउन आंदोलन की घोषणा की है. इस संबंध में नगर आयुक्त को पत्र देकर तत्काल कार्रवाई की मांग की गयी है.
12 सितंबर की घटना को बताया गंभीर
कर्मचारियों ने पत्र में 12 सितंबर को बोर्ड बैठक स्थगित होने के बाद निगम परिसर में कुछ वार्ड पार्षदों तथा बाहरी या अनधिकृत व्यक्तियों के कथित आक्रामक व्यवहार का उल्लेख किया है. पत्र के अनुसार, वार्ड 20 की पार्षद चांदनी चौधरी के पति कैलाश चौधरी पर अधिकारियों-कर्मचारियों को निगम परिसर में "गाड़ देने" जैसी धमकी देने का आरोप है. पत्र में कहा गया है कि कथित धमकी का वीडियो सोशल मीडिया और फेसबुक पर प्रसारित हुआ है.
जातिसूचक और लैंगिक टिप्पणी की शिकायत
पत्र में कुछ अधिकारियों-कर्मचारियों को नाम लेकर कथित जातिसूचक, अपमानजनक और लैंगिक टिप्पणियों का निशाना बनाने का आरोप लगाया गया है. कर्मचारियों ने कहा कि ऐसे मामलों की स्वतंत्र जांच हो और तथ्य व कानूनी तत्व सामने आने पर संबंधित कानून के तहत कार्रवाई की जाए.
भुगतान और प्रशासनिक काम में हस्तक्षेप का आरोप
पत्र में कुछ पार्षदों द्वारा इंजीनियरिंग शाखा में जाकर पूर्ण कार्यों के भुगतान से पहले एंडोर्समेंट कराने और ठेकेदारों से भुगतान से पहले मिलने का दबाव बनाने की शिकायतों का उल्लेख है. सफाई कर्मियों, वार्ड जमादारों, चालकों, सिटी मैनेजर, खाद्य सुरक्षा निरीक्षकों और अतिक्रमण हटाओ टीम पर भी कथित दबाव की बात कही गयी है.
10 प्रमुख मांगें रखीं
कर्मचारियों ने पत्र में 10 प्रमुख मांगें रखी हैं.
12 सितंबर की घटनाओं की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच हो.
सीसीटीवी, वायरल वीडियो और अन्य साक्ष्य सुरक्षित रखे जाएं.
कैलाश चौधरी के कथित धमकी मामले में विधिसम्मत कार्रवाई हो.
तथ्य और कानूनी तत्व मिलने पर एससी-एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई हो.
महिला कर्मियों से जुड़ी कथित लैंगिक टिप्पणियों की स्वतंत्र जांच हो.
वार्ड 20 की पार्षद के खिलाफ लागू कानून के तहत सक्षम प्राधिकारी के समक्ष कार्रवाई की अनुशंसा हो.
शाखाओं में अनधिकृत प्रवेश और प्रशासनिक दबाव पर रोक लगे.
ठेकेदारों को किसी पार्षद से मिलने के लिए बाध्य नहीं किया जाए.
कर्मियों को सुरक्षित और भयमुक्त कार्य वातावरण मिले.
शिकायत मिलते ही तत्काल कार्रवाई के लिए जीरो टॉलरेंस प्रोटोकॉल लागू हो.
सम्मान और भयमुक्त वातावरण में सेवा की बात
कर्मियों ने कहा कि वे काम से भागना नहीं चाहते, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और भयमुक्त वातावरण में जनता की सेवा करना चाहते हैं. पत्र में श्रावणी मेला के दौरान 12-12 घंटे की ड्यूटी और कई कर्मचारियों के तीन से नौ माह तक वेतन विलंब का भी उल्लेख किया गया है.
