मधुपुर : स्थानीय डाकबंगला मैदान में अशरफी वेलफेयर सोसाइटी के तत्वावधान में बुधवार को ईद मिलादुन्नबी के अवसर पर दुआ कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम में विभिन्न मोहल्लों से निकले जुलूस में शामिल लोग उपस्थित हुए.
पैगंबर-ए-इस्लाम की शिक्षाओं को जीवन में उतारने की अपील
प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हफीजुल हसन ने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम की पूरी जिंदगी इंसानियत, रहमत, मोहब्बत, इंसाफ, भाईचारे, सहनशीलता और अमन का पैगाम देती है. उन्होंने कहा कि समाज में जब विभिन्न कारणों से दूरियां और मतभेद पैदा होते हैं, ऐसे समय में पैगंबर-ए-इस्लाम की सीरत और उनकी शिक्षाएं पूरी इंसानियत के लिए मार्गदर्शन का काम करती हैं.
मोहब्बत, रहमदिली और इंसाफ का रास्ता अपनाने का संदेश
उन्होंने कहा कि जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी केवल खुशी और जश्न का अवसर नहीं, बल्कि अपनी जिंदगी में पैगंबर-ए-इस्लाम की शिक्षाओं को उतारने और उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लेने का भी अवसर है. समाज में हर व्यक्ति के अधिकारों का सम्मान करना, जरूरतमंदों की मदद करना और कमजोर तबके के लोगों के साथ खड़ा होना ही उनकी शिक्षाओं पर अमल है.
मधुपुर की गंगा-जमुनी तहजीब का किया जिक्र
मंत्री ने कहा कि मधुपुर की पहचान गंगा-जमुनी तहजीब, सामाजिक सौहार्द, अमन और भाईचारे के लिए रही है. यहां के लोग हर पर्व और त्योहार को आपसी प्रेम एवं सद्भाव के साथ मनाते आ रहे हैं. उन्होंने कहा कि जुलूस-ए-मोहम्मदी के माध्यम से भी दुनिया को यही संदेश जाना चाहिए कि मोहब्बत नफरत से बड़ी है, इंसानियत हर भेदभाव से ऊपर है और अमन समाज की सबसे बड़ी ताकत है.
दुआ के साथ कार्यक्रम का हुआ समापन
कार्यक्रम का समापन दुआ के साथ किया गया. इस अवसर पर मौलाना वदीर अहमद अशरफी, मुफ्ती परवेज आलम, मौलाना मुस्लिम अख्तर शिवानी, मौलाना अजमल नूरी, मौलाना मुबाशीरुल इस्लाम नूरी और मौलाना अब्दुल हकीम रिजवी समेत उलमा-ए-किराम ने भी संबोधित किया. कार्यक्रम में दर्जनों लोग मौजूद थे.
