प्रतिनिधि, सारठ. सारठ व सारवां की सीमा पर स्थित मनिगढ़ी पंचायत के मनिगढ़ी गांव निवासी 57 वर्षीय शैल देवी पिछले सात माह से विधवा पेंशन की राशि नहीं मिलने के कारण आर्थिक संकट से जूझ रही हैं. पति की मृत्यु के बाद स्वीकृत हुई पेंशन ही उनके लिए बड़ा सहारा थी, लेकिन सात महीने से राशि बंद होने के कारण दवा और रोजमर्रा के खर्च को पूरा करना मुश्किल हो गया है.
पति गांव के प्रधान थे, मौत के बाद मिली थी पेंशन
शैल देवी ने बताया कि उनके पति स्व. नंदकिशोर लाल गांव के प्रधान थे. उनकी मृत्यु के बाद सारवां प्रखंड कार्यालय की ओर से विधवा पेंशन की स्वीकृति दी गयी थी. इसके बाद उन्हें प्रत्येक माह एक हजार रुपये पेंशन मिल रही थी. इसी राशि से वह किसी तरह अपना जीवन-यापन कर रही थीं.
एक हजार की पेंशन से चलता था दवा का खर्च
शैल देवी के अनुसार, मिलने वाली एक हजार रुपये की मासिक पेंशन से अधिकांश राशि दवा पर खर्च हो जाती थी. उनका बेटा उज्ज्वल भी अभी नाबालिग है. ऐसे में पेंशन बंद होने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति और खराब हो गयी है. पिछले सात माह से खाते में राशि नहीं आने के कारण उन्हें रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने में भी परेशानी हो रही है.
ऑनलाइन जांच कर कारण पता लगाएगा विभाग
मामले को लेकर बीडीओ रजनीश कुमार ने कहा कि महिला की शिकायत की ऑनलाइन जांच करायी जाएगी. उन्होंने बताया कि कार्यालय से जांच कर यह पता लगाया जाएगा कि पिछले सात माह से पेंशन की राशि खाते में क्यों नहीं जा रही है. कारण सामने आने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.
