संवाददाता, सारठ: सारठ प्रखंड में सरकारी योजनाओं के तहत कराए गए कार्यों और सामग्री आपूर्ति के भुगतान में GST को लेकर राज्य कर विभाग ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. देवघर अंचल के राज्य कर संयुक्त आयुक्त कार्यालय से सारठ समेत संबंधित प्रखंडों के बीडीओ को पत्र भेजकर पिछले नौ वित्तीय वर्षों में हुए भुगतान का विस्तृत ब्योरा मांगा गया है.
विभाग ने वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2025-26 तक मनरेगा/नरेगा, 15वें वित्त आयोग समेत अन्य योजनाओं में काम करने वाले वेंडर और कंट्रैक्टरों से संबंधित भुगतान की जानकारी मांगी है. इस कार्रवाई के बाद सरकारी योजनाओं में हुए कार्यों, सामग्री आपूर्ति और GST भुगतान के रिकॉर्ड के मिलान से कई सवालों के जवाब सामने आने की उम्मीद है.
9 साल के भुगतान का मांगा पूरा हिसाब
राज्य कर विभाग की ओर से जारी पत्र में संबंधित प्रखंडों से वेंडर और कंट्रैक्टर का नाम, वित्तीय वर्ष, GSTIN, PAN, कार्य की प्रकृति और भुगतान की गई राशि समेत विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है.
यानी विभाग सिर्फ किसी एक योजना या एक वित्तीय वर्ष के भुगतान की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि करीब नौ वित्तीय वर्षों के रिकॉर्ड को खंगालने की तैयारी में है.
प्राप्त आंकड़ों का राज्य कर विभाग के स्तर पर मिलान किया जाएगा. इसके बाद यह देखा जाएगा कि सरकारी योजनाओं के तहत भुगतान की गई राशि के अनुरूप संबंधित वेंडर या कंट्रैक्टर की ओर से GST का भुगतान किया गया है या नहीं.
जलमीनार और हैंडवॉश योजनाओं पर भी नजर
सारठ प्रखंड की विभिन्न पंचायतों में लगाई गई जलमीनार, हैंडवॉश यूनिट और पंचायतों में आपूर्ति किए गए उपस्कर व अन्य सामग्री से संबंधित योजनाएं भी जांच के दायरे में आ सकती हैं.
इन योजनाओं में कार्य और सामग्री की प्रकृति, भुगतान की राशि तथा उससे जुड़े GST रिकॉर्ड का मिलान किए जाने की संभावना है. यदि जांच के दौरान बिल के अनुरूप GST जमा नहीं करने, गलत GSTIN के इस्तेमाल या कर से जुड़ी अन्य अनियमितता की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कर वसूली और विभागीय कार्रवाई हो सकती है.
भुगतान और GST रिकॉर्ड के मिलान से खुलेगा राज
राज्य कर विभाग ने पत्र में राजस्व हित में मांगी गई सूचना को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है.
अब प्रखंड स्तर से उपलब्ध कराए जाने वाले आंकड़ों के आधार पर सरकारी योजनाओं में हुए भुगतान और संबंधित GST रिकॉर्ड का मिलान महत्वपूर्ण होगा. इसी प्रक्रिया से यह स्पष्ट हो सकेगा कि भुगतान की गई राशि के अनुपात में नियमानुसार GST जमा किया गया था या नहीं.
शिकायत के बाद डीपीआरओ ने भी मांगी जांच
इधर, मामले में डीपीआरओ, देवघर की ओर से भी बीडीओ, सारठ को पत्र भेजकर जांच रिपोर्ट मांगे जाने की बात सामने आई है.
बताया गया है कि शिकायत के आधार पर और डीडीसी के निर्देश के बाद डीपीआरओ ने प्रखंड क्षेत्र में कराए गए जलमीनार, हैंडवॉश और अन्य सामग्री आपूर्ति संबंधी कार्यों में GST कर से जुड़ी शिकायतों की जांच कराने को कहा है.
शिकायत में सरकारी स्तर से वेंडरों को किए गए भुगतान में GST से संबंधित कथित अनियमितता का आरोप लगाया गया है. हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता जांच और संबंधित दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही स्पष्ट होगी.
अब दस्तावेजों की जांच पर टिकी नजर
राज्य कर विभाग द्वारा नौ वित्तीय वर्षों का विस्तृत भुगतान ब्योरा मांगे जाने और दूसरी ओर डीपीआरओ स्तर से जांच की मांग किए जाने के बाद सारठ में सरकारी योजनाओं से जुड़े भुगतान अब जांच के केंद्र में हैं.
अब वेंडर-कंट्रैक्टरों के नाम, GSTIN, PAN, कार्य की प्रकृति, भुगतान राशि और GST रिकॉर्ड के मिलान के बाद ही यह तस्वीर साफ होगी कि योजनाओं में कर नियमों का पालन किस स्तर तक हुआ है.
अगर जांच में GST से जुड़ी अनियमितता प्रमाणित होती है, तो संबंधित मामलों में कर वसूली समेत नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है.
