कल्चरल हेरिटेज के रूप में विकसित होगा देवघर, सांस्कृतिक विरासतों को मिलेगा संरक्षण

लोकसभा में देवघर को जीवंत शहर घोषित करने का विधेयक प्रस्तुत संवाददाता, देवघर बाबा बैद्यनाथ की नगरी देवघर की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के उद्देश्य से लोकसभा में गोड्डा सांसद डॉ निशिकांत दुबे ने’

लोकसभा में देवघर को जीवंत शहर घोषित करने का विधेयक प्रस्तुत

संवाददाता, देवघर

बाबा बैद्यनाथ की नगरी देवघर की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. गोड्डा सांसद डॉ निशिकांत दुबे ने लोकसभा में देवघर को ‘जीवंत शहर’ घोषित करने का विधेयक प्रस्तुत किया है. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस विधेयक को चर्चा के लिए सूचीबद्ध करने की सहमति भी प्रदान कर दी है. सांसद डॉ दुबे ने भारत सरकार के कला एवं संस्कृति मंत्रालय के समक्ष ‘द होली सिटी ऑफ देवघर’ बिल प्रस्तुत करते हुए देवघर को कल्चरल हेरिटेज सिटी घोषित करने की मांग की है. विधेयक की मंजूरी मिलने पर देवघर जिले की सांस्कृतिक, पौराणिक और प्राकृतिक धरोहरों को कानूनी व संस्थागत संरक्षण मिल सकेगा. विधेयक में उल्लेख किया गया है कि देवघर विश्व के प्राचीन शहरों में से एक है, जहां सैकड़ों वर्षों पुराने हजारों मंदिर, उपासना स्थल और सांस्कृतिक केंद्र मौजूद हैं. इस पौराणिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए देवघर को कल्चरल हेरिटेज के रूप में विकसित करना समय की आवश्यकता है.

देवघर की ऐतिहासिक व सांस्कृतिक पहचान

विधेयक में कहा गया है कि देवघर भारत का अत्यंत प्राचीन और ऐतिहासिक शहर है. यहां बाबा बैद्यनाथ धाम स्थित है, जो देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है. महात्मा गांधी आजादी की लड़ाई की शुरुआत देवघर से करना चाहते थे. रवींद्रनाथ टैगोर ने भी यहां लंबे प्रवास के दौरान शांतिनिकेतन जैसी शैक्षणिक-सांस्कृतिक स्थापना का विचार किया था. रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद देवघर में प्रवास कर चुके हैं. यहां श्रीश्री ठाकुर अनुकूलचंद्र का सत्संग आश्रम, स्वामी सत्यानंदजी का रिखिया आश्रम, तथा 100 वर्ष से अधिक पुराना आरके मिशन शिक्षण संस्थान स्थित है. ईश्वरचंद्र विद्यासागर और सखाराम देउस्कर जैसे महापुरुषों की कर्मभूमि भी देवघर रहा है.

सांस्कृतिक विरासत को मिलेगा तकनीकी संरक्षण

विधेयक में इस बात पर जोर दिया गया है कि देवघर की सांस्कृतिक विरासतों का वैज्ञानिक, तकनीकी, प्रशासनिक और वित्तीय दृष्टिकोण से संरक्षण किया जाना आवश्यक है. बिना समुचित कार्ययोजना के हो रहे बड़े निर्माण कार्यों से कई सांस्कृतिक केंद्रों के नष्ट होने का खतरा पैदा हो गया है. विधेयक के पारित होने पर ऐसे निर्माण कार्यों पर नियंत्रण संभव होगा और संस्कृति मंत्रालय के माध्यम से देवघर की सांस्कृतिक व प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण, परीक्षण और रख-रखाव के लिए विशेष योजनाएं बनायी जा सकेंगी. इससे देवघर की सांस्कृतिक पहचान और अधिक सशक्त और संरक्षित हो सकेगी.

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Published by: Amarnath poddar

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