देवघर में केंद्रीय टीम की एंट्री, FCI गोदाम से राशन दुकानों तक होगी पड़ताल; किसी भी दुकान का हो सकता है औचक निरीक्षण

देवघर में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) की केंद्रीय जांच शुरू हो गई है. भारत सरकार की टीम 15 से 19 सितंबर तक एफसीआई गोदामों, राइस मिलों और राशन दुकानों का निरीक्षण करेगी. यह जांच भंडारण से लेकर वितरण तक की प्रक्रिया की पड़ताल करेगी.

देवघर : देवघर जिले की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) अब केंद्रीय जांच के दायरे में है. खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय, भारत सरकार की टीम 15 से 19 सितंबर तक जिले में पीडीएस व्यवस्था की जमीनी पड़ताल करेगी. टीम एफसीआई, सीडब्ल्यूसी, एसडब्ल्यूसी के गोदामों के अलावा राइस मिलों और जन वितरण प्रणाली की दुकानों का निरीक्षण करेगी.

बुधवार से शुरू होगा फील्ड निरीक्षण

जिला आपूर्ति पदाधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार उप निदेशक (एस एंड आर) डॉ प्रीति शुक्ला तकनीकी अधिकारियों की टीम के साथ देवघर पहुंच गयी हैं. टीम बुधवार से विभिन्न स्थानों का फील्ड निरीक्षण शुरू करेगी.

भंडारण से वितरण तक होगी जांच

इस दौरान गोदामों में खाद्यान्न के भंडारण, उठाव, परिवहन और वितरण की प्रक्रिया की जांच की जायेगी. वहीं राशन दुकानों पर लाभुकों को खाद्यान्न वितरण की वास्तविक स्थिति, स्टॉक और संबंधित अभिलेखों का भी मिलान किया जा सकता है.

किसी भी पीडीएस दुकान पर पहुंच सकती है टीम

जिला आपूर्ति कार्यालय की ओर से जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि केंद्रीय जांच दल जिले की किसी भी पीडीएस दुकान का औचक निरीक्षण कर सकता है. इसके मद्देनजर सभी प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारियों (एमओ) और डीलरों को दुकान, स्टॉक और जरूरी रिकॉर्ड निरीक्षण के लिए तैयार रखने का निर्देश दिया गया है.

अधिकारियों और डीलरों में हलचल

केंद्रीय टीम के दौरे से विभागीय अधिकारियों और डीलरों में हलचल है. निरीक्षण से पीडीएस में खाद्यान्न की आपूर्ति और वितरण की वास्तविक तस्वीर सामने आने की उम्मीद है.

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लेखक के बारे में

By विजय कुमार

विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन दशक से अधिक का अनुभव है. पिछले 22 वर्षों से लगातार प्रभात खबर से जुड़ा हूं. शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे विषयों पर सिर्फ ग्राउंड रिपोर्टिंग ही नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और जनहित की आवाज बनने का काम किया. बिजली, नगर निगम व कृषि से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया. ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति सामने लाकर नीति निर्माण में योगदान दिया. पत्रकारिता की पढ़ाई महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से की.

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