अक्षय तृतीया पर बाबा बैद्यनाथ का हुआ अलौकिक शृंगार

अक्षय तृतीया के अवसर पर बाबा बैद्यनाथ मंदिर में भव्य महाशृंगार का आयोजन किया गया। महंत श्री गुलाबनंद ओझा ने विधिवत शिवलिंग का शृंगार किया, जिसमें जलार्पण, इत्र, कस्तूरी और पुष्प अर्पित किए गए। पूजा के दौरान श्रद्धालुओं का प्रवेश रोक दिया गया था, लेकिन बाद में उन्हें विशेष दर्शन का अवसर मिला। मंझला खंड में दान पूजा अनुष्ठान में बाबा और माता पार्वती के लिए सांसारिक वस्त्र और उपयोगी चीजें जैसे पलंग, गद्दा और मच्छरदानी आदि का पूजन किया गया। अनेक प्रकार के मिष्ठानों का भोग भी अर्पित किया गया। यह प्राचीन परंपरा केवल महंत को करने का विशेष अधिकार है। श्रद्धालुओं ने लाइव टेलीकास्ट के माध्यम से इस शुभ अवसर का आनंद लिया।

मंझला खंड में संपन्न हुआ दान पूजा अनुष्ठान, अर्पित हुए विविध वस्त्र और भोग संवाददाता, देवघर अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर सोमवार को बाबा बैद्यनाथ मंदिर में भव्य महाशृंगार का आयोजन किया गया. परंपरा के अनुसार मंदिर महंत सह सरदार पंडा श्रीश्री गुलाबनंद ओझा ने विधिवत बाबा भोलेनाथ का दिव्य शृंगार किया. इस विशेष अनुष्ठान के दौरान आम श्रद्धालुओं के प्रवेश पर रोक रही, जबकि पूजा संपन्न होने के बाद भक्तों को विशेष दर्शन का अवसर दिया गया. शाम 7:28 बजे शुरू हुआ महाशृंगार महाशृंगार की प्रक्रिया शाम में मां काली मंदिर में शृंगार के बाद प्रारंभ हुई और ठीक 7:28 बजे मंदिर का पट खोला गया. गर्भगृह में प्रवेश कर पुजारी चंदन झा ने शिवलिंग पर चढ़े गलंतिका, फूल और बेलपत्र को हटाकर मलमल के कपड़े से बाबा को स्वच्छ किया. इसके बाद महंत गुलाबनंद ओझा ने जलार्पण कर इत्र, फूलेल और कस्तूरी युक्त चंदन अर्पित कर बाबा का अलौकिक शृंगार शुरू किया. घाम चंदन और पुष्प अर्पित कर विशेष भोग लगाया गया और आरती के साथ शृंगार पूजा का प्रथम चरण संपन्न हुआ. मंझला खंड में दान पूजा इसके उपरांत मंदिर परंपरा के तहत मंझला खंड में दान अनुष्ठान आयोजित हुआ. यहां बाबा और माता पार्वती के लिए सांसारिक उपयोग की वस्तुएं जैसे पलंग, गद्दा, तकिया, मच्छरदानी और खड़ाऊं आदि का विधिवत पूजन कर दान की रस्म निभाई गई. मुख्य पूजा इस्टेट के पुरोहित श्रीनाथ पंडित ने संपन्न करायी, जबकि उपचारक भक्तिनाथ फलहारी ने सहयोग किया. इस दौरान बाबा को दर्जनों प्रकार के मिष्ठानों का भोग भी अर्पित किया गया. मंदिर की यह प्राचीन परंपरा विशेष महत्व रखती है और महाशृंगार का अधिकार केवल मंदिर महंत को ही प्राप्त है. आम श्रद्धालुओं ने एलईडी स्क्रीन के माध्यम से लाइव टेलीकास्ट में इस दिव्य महाशृंगार का दर्शन कर आस्था व्यक्त की.

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Published by: Sanjeev mishra

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