प्रतिनिधि, चितरा; कोलियरी प्रक्षेत्र के तेली पांडुआ गांव में आयोजित श्रीश्री 1008 शतचंडी महायज्ञ के दौरान आध्यात्मिक वातावरण उस समय और अधिक भक्तिमय हो उठा, जब बनारस से आयी कथावाचिका अमृता त्रिपाठी ने मंगलवार की रात को भगवान श्रीराम के जन्म व नामकरण संस्कार का मार्मिक प्रसंग सुनाया. कथावाचिका ने प्रवचन के दौरान कहा कि त्रेता युग में अयोध्या नगरी के राजा दशरथ के यहां पुत्र प्राप्ति के लिए किए गए यज्ञ के फलस्वरूप भगवान विष्णु ने श्रीराम के रूप में अवतार लिया. उन्होंने प्रवचन के दौरान बताया कि चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को अयोध्या में भगवान श्रीराम का जन्म हुआ और पूरा नगर आनंद व उत्सव में डूब गया. भगवान के जन्म लेते पूरा अयोध्यावासी खुशी से नाचने लगे. प्रकृति भी खुशी से झूमने लगी. जिससे चारों तरफ खुशी का वातावरण छा गया. वहीं, नामकरण संस्कार का उल्लेख करते हुए कहा कि महर्षि वशिष्ठ ने राजकुमार का नाम राम रखा, जिसका अर्थ है-जो सबके हृदय में रमण करें और समस्त संसार को आनंद प्रदान करें. इस दौरान श्रद्धालु जय श्रीराम के उद्घोष से पंडाल को गुंजायमान करते रहे. वहीं, कथावाचिका ने श्रीराम के जीवन को मर्यादा, आदर्श और धर्म पालन का प्रतीक बताते हुए कहा कि वर्तमान समय में भी उनके चरित्र से प्रेरणा लेकर समाज को सत्य, त्याग और कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ना चाहिए. साथ ही विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान, हवन-पूजन एवं प्रवचन का आयोजन किया जा रहा है. श्रद्धालु महायज्ञ कुंड की परिक्रमा कर रहे हैं. मौके पर मुखिया सागर मंडल, संजय मंडल, नित्यानंद यादव, श्याम सुंदर, शंकर, मनोज, पप्पू, मुन्ना, नागेश्वर समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे. हाइलार्ट्स : बनारस से आयीं कथावाचिका अमृता त्रिपाठी ने सुनाया भगवान श्रीराम के जन्म व नामकरण का दिव्य वर्णन
श्रीश्री 1008 शतचंडी महायज्ञ में गूंजा राम जन्म का प्रसंग

श्रीश्री 1008 शतचंडी महायज्ञ में गूंजा राम जन्म का प्रसंग
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बनारस से आयीं कथावाचिका अमृता त्रिपाठी ने सुनाया भगवान श्रीराम के जन्म व नामकरण का दिव्य वर्णन