चितरा. केंद्र सरकार की श्रम नीतियों और नए श्रम कानूनों के विरोध में अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस ने एक अप्रैल को देशभर में काला दिवस मनाने की घोषणा की है. इस संबंध में संगठन के राष्ट्रीय परिषद सदस्य पशुपति कोल ने बयान जारी कर कहा कि नये श्रम कानून श्रमिकों के हितों के खिलाफ हैं. उन्होंने कहा कि श्रम कोड लागू होने से काम के घंटे बढ़ सकते हैं, ठेका प्रथा को बढ़ावा मिलेगा और स्थायी रोजगार की व्यवस्था कमजोर होगी. इससे मजदूरों की नौकरी की सुरक्षा प्रभावित होगी और नियोक्ताओं को अधिक छूट मिल जायेगी. उनका आरोप है कि सरकार श्रमिकों के पुराने अधिकारों को खत्म कर पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने का प्रयास कर रही है. पशुपति कोल ने बताया कि काला दिवस के मौके पर एटक कार्यकर्ता काला बिल्ला लगाकर विरोध जतायेंगे और श्रमिकों को नए कानूनों के संभावित दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करेंगे. उन्होंने श्रमिकों, कर्मचारियों और विभिन्न मजदूर संगठनों से इस आंदोलन में शामिल होकर इसे सफल बनाने की अपील की. उन्होंने यह भी कहा कि श्रम कानूनों में संशोधन को लेकर पहले ही सरकार को अल्टीमेटम दिया गया था, लेकिन अब तक कोई पहल नहीं हुई है. यदि सरकार मजदूर विरोधी कानूनों को वापस नहीं लेती है, तो आंदोलन को और तेज किया जायेगा. काला दिवस के जरिए सरकार को यह संदेश दिया जायेगा कि देश का मजदूर अपने अधिकारों से समझौता नहीं करेगा.
श्रम कानूनों के विरोध में एटक कल मनायेगी काला दिवस
चितरा : नये श्रम कानूनों के विरोध में अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस का करेगी प्रदर्शन
