मारगोमुंडा. प्रखंड क्षेत्र के पीपरा गांव में जन्मे की वफात पर लोगों ने खिराज-ए-अकीदत पेश किया. इस दौरान लोगों ने उन्हें याद करते हुए उनके सरल स्वभाव का बखान किया. बताया जाता है कि हाजी हुसैन अंसारी 23 जुलाई 1947 को जन्म हुआ था. शिक्षा ग्रहण करने के बाद झारखंड आंदोलन में वो युवा काल में ही कूद पड़े थे. इस दौरान 90 के दशक में झारखंड मुक्ति मोर्चा में शामिल हुए और झारखंड अलग राज्य आंदोलन में लग गए. उन्होंने आंदोलन को संथाल परगना क्षेत्र के गांव गांव में पहुंचाया और एक बड़ी आबादी को आंदोलन का महत्व समझाते हुए आंदोलन का हिस्सा बनाया. जिससे शिबू सोरेन के नेतृत्व में चल रहे झारखंड आंदोलन को अधिक गति मिला. वर्ष 1995 और 2000 ई. के विधानसभा चुनाव में झामुमो के टिकट पर वे संयुक्त बिहार में विधानसभा के लिए चुने गये. वर्ष 2009 एवं 2019 में वह चौथी बार विधानसभा के लिए चुने गये. वर्ष 2004 में वह विपक्ष के नेता भी चुने गये, हाजी हुसैन अंसारी हज कमेटी के चेयरमैन भी लंबे समय रहे. वर्ष 2011 में मंत्री बने इसके बाद 2013 में दोबारा मंत्री बने. इसके बाद 2019 में अल्पसंख्यक कल्याण एवं निबंधन मंत्री बनाया गया, जिसपर उन्होंने बहुत तेजी से विकास के कार्य कर रहे थे, लेकिन असमय तीन अक्तूबर 2020 को ह्रदय गति रुक जाने के कारण इनका देहांत हो गया. जिसपर सरकार ने दो दिनों का राजकीय अवकाश घोषित किया था. हाजी हुसैन अंसारी ने अपने मंत्री कार्यकाल में प्लस टू, हाइस्कूल और प्राइमरी स्कूल टीचर नियुक्ति पर जोर देकर कराया. 186 मदरसों में छठा वेतनमान एवं 44 मदरसों को अनुदान से जोड़ा गया. सभी जिलों में छात्रावास एवं बड़ी संख्या में कब्रिस्तान घेराबंदी का कार्य करवाया. इन्होंने केन्द्रीय एमएसडीपी योजना अंतर्गत नर्सिंग कॉलेज, पॉलिटेक्निक और आईटीआई आदि की स्थापना करवाया. निबंध विभाग के मंत्री रहते हुए इन्होंने गैर मजरूवा भूमी भूमिहीन लोगों को देने का निर्देश दिया. झारखंड छात्र संघ के प्रस्ताव पर इन्होंने बिहार के तर्ज पर झारखंड हज हाउस में यूपीएससी, जेपीएससी, जेएसएससी की मुफ्त कोचिंग के लिए अल्पसंख्यक कोचिंग योजना की मंजूरी और 50 लाख रुपया आवंटित किया. लोग इनके द्वारा किये गये कार्यों को आज भी याद करते हैं.
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