राष्ट्रीय लोक अदालत. प्री-लिटीगेशन व पोस्ट-लिटीगेशन के मामलों में सुलह
2.34 करोड़ पर तय हुआ समझौता
देवघर न्याय मंडल में बनाये गये थे 12 बेंच
देवघर : राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) व झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा) के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से देवघर न्याय में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया. इसके कुल 4,138 मामलों का निष्पादन सुलह के आधार पर किया गया. इसमें प्री-लिटीगेशन व पोस्ट-लिटीगेशन दोनों प्रकृति के मामले शामिल हैं. निष्पादित मामलाें में बैंक के ऋण संबंधित मामले सबसे अधिक थे. इसके अलावा बिजली विभाग, वन विभाग, मापतौल, क्रिमिनल केस, सिविल केस, चेक बाउंस के केस, रेलवे, श्रम विभाग, फेमिली कोर्ट, अनुमंडल कोर्ट आदि के मामलों में सुलह हुअा. विभिन्न प्रकार के मामलाें में 2,34,42,261 रुपये पर समझौता तय हुआ. लाखों रुपये की नकद वसूली भी हुई.
प्रधान जिला जज ने किया उद्घाटन
राष्ट्रीय लोक अदालत के उद्घाटन के अवसर पर हजारों लोग मौजूद थे. प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सज्जन कुमार दुबे ने दीप जलाकर इसका उदघाटन किया. पीडीजे ने कहा कि यह सुनहरा मौका है जिसका लाभ लें व मुकदमों के झंझट से निजात पायें. शांति से जीने के लिए केस-मुकदमा के चक्कर से निजात पाने के लिए लोक अदालत उतम माध्यम है. लोक अदालत के फैसले में दोनों पक्षों की जीत होती है. कोई पक्ष हारता नहीं है. इतना ही नहीं इसकी अपील कहीं भी नहीं होती है. इस अवसर पर सिविल कोर्ट के न्यायिक पदाधिकारियों सहित स्टेट बार काउंसिल के कार्यकारी उपाध्यक्ष बालेश्वर प्रसाद सिंह, जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष वैद्यनाथ यादव समेत सैकड़ो अधिवक्ता, विभिन्न विभागों के पदाधिकारी आदि शामिल हुए.
न्याय मंडल में बनाये गये थे 12 बेंच
मामलाें की सुनवाई के लिए देवघर न्याय मंडल में 12 बेंच बनाये गये थे. आठ बेंच देवघर न्याय सदन में व चार बेंच मधुपुर में बनाये गये थे. हरेक बेंच में न्यायिक पदाधिकारी व सदस्य लगाये गये थे. बेंच संख्या तीन में बिजली व वन विभाग के मुकदमों की सुनवाई की जा रही थी. इस बेंच में 70 से भी अधिक मामले निष्पादित हुए. इस बेंच में सेशन जज चार लोलार्क दुबे, सदस्य एफ मरीक व कौशल कुमार थे. अन्य बेंचों में एडीजे एक अजीत कुमार, एडीजे दो कृष्ण कुमार, एडीजे छह गोपाल पांडेय, रिटेेनर निलांजन गांगुली, संजय कुमार मिश्र आदि थे. विभिन्न विभागों, बैंकों के अधिकारी आये व मामलों की सुनवाई में सहयोग किये.
