प्रवचन:::: प्रत्येक चक्र के बाद श्वास को सामान्य होने दें

यह एक चक्र हुआ. ऐसे तीन चक्रों से प्रारंभ करते हुए धीरे-धीरे 10 चक्रों तक अभ्यास बढ़ाइये. प्रत्येक च्रक के बाद श्वास को सामान्य होने दीजिये. स्वाधिष्ठान ध्यान: चेतना को स्वाधिष्ठान चक्र पर केंद्रित कीजिये. गहरी श्वास लीजिये. प्रश्वास के साथ ‘व’ मंत्र को दुहराइये. माला के मनकों की तरह मंत्र की प्रत्येक आवृत्ति एक-दूसरे […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | December 21, 2014 6:02 PM

यह एक चक्र हुआ. ऐसे तीन चक्रों से प्रारंभ करते हुए धीरे-धीरे 10 चक्रों तक अभ्यास बढ़ाइये. प्रत्येक च्रक के बाद श्वास को सामान्य होने दीजिये. स्वाधिष्ठान ध्यान: चेतना को स्वाधिष्ठान चक्र पर केंद्रित कीजिये. गहरी श्वास लीजिये. प्रश्वास के साथ ‘व’ मंत्र को दुहराइये. माला के मनकों की तरह मंत्र की प्रत्येक आवृत्ति एक-दूसरे से जुड़ी रहे. प्रश्वास के दौरान वं वं वं…. कहिये और इसके कंपनों को स्वाधिष्ठान में अनुभव कीजिये. इस तरह 13 चक्र कीजिये तथा स्वाधिष्ठान की संवेदना को गहरा कीजिये. अपने अंतर्नेत्रों के सामने पानी में तैरते हुए विशाल मगरमच्छ का चित्र लाइये जिसकी आंखें अधखुली हों, मानो वह सो रहा है. उसे स्पष्ट रूप से देखिये. अब गहन अंधकारयुक्त आकाश में सफेद चमकदार अर्धचंद्र को देखिये. उसके आसपास कुछ झिलमिलाते तारे भी देखिये. नीचे विशाल क्षेत्र में फैले सागर को भी देखिये- नीचे सागर, ऊपर अधर्चंद्र.