देवघर : गुरु के संकल्पों को पूरा करना कर्तव्य : निरंजनानंद

देवघर : रिखियापीठ में पांच दिवसीय शतचंडी महायज्ञ की पूर्णाहुति 1008 कन्याओं के पूजन व भोज के साथ की गयी. अंतिम दिन महायज्ञ में पहुंचे स्वामी निरंजनानंद जी ने स्वामी सत्संगीजी के साथ कन्याओं का मंत्रोच्चारण के साथ पूजन किया. दोपहर में देवी मां की आराधना हुई व बसोधारा से यज्ञ की पूर्णाहुति हुई. संध्या […]

देवघर : रिखियापीठ में पांच दिवसीय शतचंडी महायज्ञ की पूर्णाहुति 1008 कन्याओं के पूजन व भोज के साथ की गयी. अंतिम दिन महायज्ञ में पहुंचे स्वामी निरंजनानंद जी ने स्वामी सत्संगीजी के साथ कन्याओं का मंत्रोच्चारण के साथ पूजन किया.

दोपहर में देवी मां की आराधना हुई व बसोधारा से यज्ञ की पूर्णाहुति हुई. संध्या में रात-सीता की प्रतिमूर्ति का विवाह हुआ. स्वामी निरंजनानंद जी ने कहा कि शतचंडी महायज्ञ की शुरुआत 1995 में हुई थी. इस शुरुआत में परमहंस स्वामी सत्यानंद जी ने अपना आध्यात्मिक ऊर्जा का स्फटीक माला व शिवलिंग स्थानांतरण किया था और वह माला तथा शिवलिंग मुझे प्रदान किया.

स्वामीजी ने शतचंडी महायज्ञ के 25वें वर्ष में प्रवेश में इस माला-शिवलिंग का विशेष अनुष्ठान करने का आदेश दिया था, इस दौरान वे एकांत में आध्यात्मिक ऊर्जा से संपन्न माला-शिवलिंग के अनुष्ठान में थे.

इस अनुष्ठान में स्वामी सत्संगीजी जी ने भी अपनी ऊर्जा व शक्ति की वस्तु मुझे प्रदान की थी, जिसे लौटाया गया. स्वामी निरंजनानंद जी ने कहा कि गुरु से प्राप्त आध्यात्मिक ऊर्जा जीवन भर साथ रहता है. शतचंडी महायज्ञ गुरु स्वामी सत्यानंद जी का संकल्प है. गुरु के संकल्पों को पूरा करना हर शिष्य का कर्तव्य है. इस संकल्प का फल निश्चित तौर पर हरेक व्यक्ति को मिलेगा.

यज्ञ से एक दिव्य ऊर्जा फैलती है, इससे भक्तों को सकारात्मक ऊर्जा मिलती है. रिखियापीठ में अध्यात्म व सेवा को एक सूत्र में बांधकर दुनिया भर में संदेश दिया गया है. इस अनुष्ठान में शामिल भक्तों को उनके घरों में सुख व शांति का अनुभव प्राप्त होगा.

संन्यासपीठ हर व्यक्ति के लिए खुला

महायज्ञ में स्वामी निरंजनानंद जी ने कहा कि 2009 में रिखिया में घोषित संन्यासपीठ अब हर व्यक्ति के लिए खोल दिया गया है. साथ ही इस वर्ष मुंगेर योगपीठ को योग में सर्वश्रेष्ठ कार्य के लिए प्रधानमंत्री योग पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. अब तीन मंत्र हो गये. रिखियापीठ का नमोनारायण, योगपीठ का हरि ऊं व संन्यासपीठ का जय हो.. मंत्र होगा. इस अनुष्ठान में कन्याओं को श्रृंगार व पठन-पाठन की सामग्री दी गयी. किसानों को गाय दिया गया. अनुष्ठान में उद्योगपति नेस वाडिया समेत कई लोग पहुंचे व आशीर्वाद प्राप्त किया.

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