शहर में बेकाबू सांड से दहशत

मंदिर प्रशासन के पास व्यवस्था नहीं, घायल हो रहे श्रद्धालु दान कर मंदिर परिसर में छोड़ दिये जाते हैं बाछा देवघर : सांड को हिंदू धर्म में बाबा भोलेनाथ की सवारी नंदी के रूप में आदर भाव से देखा जाता है. लोग सांड की पूजा भी करते हैं. कई भक्त बाछा दान कर मंदिर में […]

मंदिर प्रशासन के पास व्यवस्था नहीं, घायल हो रहे श्रद्धालु

दान कर मंदिर परिसर में छोड़ दिये जाते हैं बाछा
देवघर : सांड को हिंदू धर्म में बाबा भोलेनाथ की सवारी नंदी के रूप में आदर भाव से देखा जाता है. लोग सांड की पूजा भी करते हैं. कई भक्त बाछा दान कर मंदिर में छोड़ देते हैं. लेकिन, पिछले कुछ दिनों से शहर में सांड की तादाद इतनी हो गयी है कि अब यही लोगों की परेशानी का सबब बन गये हैं.
मंदिर परिसर से लेकर आसपास के इलाके में काफी सांड घूमते रहते हैं. जबतक यह शांत होते हैं, स्थिति अनुकूल रहती है. लेकिन, इनका मूड बिगड़ते ही आसपास के लोग सहम जाते हैं. बेकाबू होने के बाद कभी ये दुकानों में तोड़फोड़ करने लगते हैं तो कभी राह चलते किसी को भी मारकर घायल कर देते हैं. पिछले कुछ महीनों से देवघर में सांड के दहशत से लोग भयभीत हैं. मंदिर परिसर में भी घूमने वाले सांड ने कई बार श्रद्धालुओं पर हमला कर घायल कर दिया.
हो सकती है बड़ी घटना
बाबा मंदिर में लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं. सामान्य दिनों को छोड़ दें तो आये दिन पर्व-त्योहार या फिर शुभ तिथि को मंदिर में काफी संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं. जिस कारण मंदिर प्रांगण समेत आसपास की संकरी गलियों में श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है. ऐसे में यदि सांड बेकाबू हुए तो फिर कभी भी कोई बड़ी घटना हो सकती है.
सांड व बाछा दान की पुरानी परंपरा : बाबाधाम में बछड़ा दान करने की परंपरा रही है. कई श्रद्धालु मनौती पूरी होने पर सांड व बछड़ा दान करते हैं. जिस कारण शहर में सौ से अधिक सांड हो गये हैं. कई बार पर्याप्त भोजन नहीं मिल पाने के कारण ये उग्र होकर आपस में ही लड़ने लगते हैं. जिससे स्थिति भयावह हो जाती है.
पहले गोशाला में रहते थे सांड: शहर में पहले गोशाला में सांड रखा जाता था. देवघर में लोग अपने पूर्वज के निमित्त श्राद्ध कर्म में सांड दान करते हैं. इसे गोशाला में दान देते थे. इसमें गोशाला संचालन की ओर से कुछ राशि ली जाती थी. इससे शहर में सांड़ का आतंक नहीं होता था. अब यह परंपरा भी लुप्त हो गयी है.
सांड का भी दिखता है दबदबा: इन सांड़ों का आतंक शाम में सहज ही देखा जा सकता है. यह अपने एरिया में दुकान दर दुकान पहुंचते हैं. वहां खड़ा हो जाते हैं. दुकानदार द्वारा कुछ खाद्य पदार्थ देने के बाद चले जाते हैं. भोजन सामग्री नहीं देने पर क्रोधित हो जाते हैं. कई बार दुकानदार की पहचान कर रास्ते में मिलने पर घायल कर देते हैं.
यहां है सबसे अधिक आतंक : बाबामंदिर परिसर, भोला पंडा पथ, लक्ष्मीपुर चौक, शिवगंगा लेन, हरिहरबाड़ी कॉलोनी, अग्रवाल आश्रम, मंदिर मोड़, बड़ा बाजार, मीना बाजार सब्जी मंडी, लक्ष्मी मार्केट, गणेश मार्केट आदि.

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