बीएड कॉलेज छोड़, कहीं भी काम नहीं हुआ शुरू

देवघर: श्रावणी मेला 2014 शुरू होने में महज 15 दिन शेष हैं. लेकिन अभी तक प्रशासनिक तैयारी बैठक व निरीक्षण तक ही सीमित है. श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जो आधारभूत संरचना अस्थायी स्ट्रर आदि तैयार होते हैं, उसका अभी तक काम भी शुरू नहीं हुआ है. बीएड कॉलेज को छोड़ दें तो अन्य कहीं […]

देवघर: श्रावणी मेला 2014 शुरू होने में महज 15 दिन शेष हैं. लेकिन अभी तक प्रशासनिक तैयारी बैठक व निरीक्षण तक ही सीमित है. श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जो आधारभूत संरचना अस्थायी स्ट्रर आदि तैयार होते हैं, उसका अभी तक काम भी शुरू नहीं हुआ है. बीएड कॉलेज को छोड़ दें तो अन्य कहीं भी जहां कांवरिये आकर रुकते हैं या अपना वाहन आदि खड़े करते हैं, कहीं बांस-बल्ला तक नहीं गिरा है. इस तरह इस बार के मेले में प्रशासनिक तैयारी काफी शिथिल है.

नेहरू पार्क और बीएड कॉलेज के पंडाल में रहता है कांवरियों का दबाव : मेले के दौरान कांवरियों का रैला इतना अधिक बढ़ जाता है कि उन्हें नेहरू पार्क और बीएड कॉलेज में बने बड़े पंडालों में रोका जाता है. वहीं से उन्हें क्यू सिस्टम के जरिए मंदिर भेजा जाता है. इसके लिए बड़े पंडालों का निर्माण कार्य अभी तक शुरू नहीं हुआ है. जबकि बीएड कॉलेज के पंडाल में लगभग 10 हजार और नेहरू पार्क के पंडाल में 15 हजार कांवरियों को क्यू में खड़ा किया जाता है.

पिछली बार नेहरू पार्क की व्यवस्था हो गयी थी फेल : प्रशासन को पिछले साल के श्रवणी मेले से सीख लेनी चाहिए कि टाइम स्लॉट सिस्टम में नेहरू पार्क का सिस्टम ध्वस्त हो गया था. बाद में पूर्व की व्यवस्था करनी पड़ी थी. आनन-फानन में बीएड कॉलेज का पंडाल बना, कॉरिडोर आदि का निर्माण करवाया गया. इस बार ऐसी कोई वैकल्पिक व्यवस्था दिख नहीं रही है. क्योंकि इस बार भी सावन में अरघा और टाइम स्लॉट प्रवेश पत्र की व्यवस्था है. इस बार भी प्रेशर बढ़ेगा जिससे निबटने के लिए वैकल्पिक उपाय पर प्रशासन की नजर नहीं है.

अस्थायी बस स्टैंड में भी पड़ा है कूड़ा: पिछली बार बाघमारा और चरकीपहाड़ी में अस्थायी वाहन पड़ाव बनाया गया था. इस बार अभी तक उक्त दोनों स्थलों की सफाई तक नहीं करायी गयी है. कूड़ा जहां-तहां पड़ा है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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