देवघर : नाबालिग के साथ दुष्कर्म व जान से मारने की नीयत से पुल से नीचे धक्का देने के दोषी पाये गये कुणाल उर्फ कुंदन हरिजन को दस साल की सश्रम सजा भरी अदालत में सुनायी गयी. साथ ही कोर्ट ने 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया. यह राशि पीड़िता को देने का आदेश दिया है. जुर्माना की राशि अदा नहीं करने पर अलग से छह माह की कैद काटनी होगी.
यह फैसला स्पेशल जज पॉक्सो एक्ट सह सेशन जज एक विजय कुमार की अदालत से स्पीडी ट्रायल में महज 950 दिनों में आया और पीड़िता को न्याय मिला. दोषी कुणाल जसीडीह के संथाली का रहनेवाला है. मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष से विशेष लोक अभियोजक ब्रह्मदेव पांडेय ने घटना के समर्थन में 11 लोगों ने गवाही दी व दोष सिद्ध करने में सफल रहे. घटना 6 अप्रैल 2016 को घटी थी.
क्या था मामला
दर्ज एफआइआर के अनुसार पीड़िता बिहार राज्य के चांदन थाना क्षेत्र के एक गांव की रहनेवाली है. उसे परिवार में घरेलू विवाद में डांटा, तो अपनी बहन जो देवघर जिले के एक गांव में रह रही है, के पास आने के लिए निकली. पाटलिपुत्र ट्रेन से जसीडीह स्टेशन पर उतरी. वहां पर ओवरब्रिज जब पार कर रही थी, तो कुणाल नामक एक युवक मिला जिसने चाउमिन खाने दिया.
कहा कि रात को स्टेशन पर अकेली जाओगी, तो पुलिस पकड़ लेगी. यह कह कर अपने साथ प्लेटफार्म नंबर तीन के निकट आम बगीचा में ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया. पुन: युवक ने पीड़िता को स्टेशन के पास बैठा दिया व ताश खेलने लगा. रात होने पर ऑटो से देवघर पहुंचाने की बात कह कर चला व डढ़वा नदी पुल के नीचे शौच करने के बहाने ले गया जहां पर दुष्कर्म किया व पुल के पास लाकर छोड़ दिया.
पीड़िता ने इसकी शिकायत की बात जब कही, तो उसे पुल से धकेल दिया जिससे वह नीचे नदी में गिर पड़ी व पैर टूट गया. उसका माथा भी फट गया था. बेहोशी की हालत में सुबह राहगीरों ने देखा, तो पुलिस को सूचना दी व नगर थाना में केस दर्ज हुआ. पुलिस ने अनुसंधान के बाद चार्जसीट दाखिल किया पश्चात केस का स्पीडी ट्रायल हुआ जिसमें स्पेशल जज उक्त सजा सुनायी व जुर्माना भी लगाया.
