सारवां : प्रखंड क्षेत्र के दुखियानाथ महादेव मंदिर प्रांगण में 1981 से सार्वजनिक वैष्णवी दुर्गा पूजा समिति द्वारा मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करायी जा रही है. इस संबंध में जानकारी देते हुए पूजा समिति के सचिव नरेश वर्मा व उपाध्यक्ष संजय राय ने बताया कि सन् 1981 में पंडित शिवनारायण पत्रलेख, पवन झा, पूर्णानंद ठाकुर, कृष्णमोहन पत्रलेख, परमेश्वरी वर्मा, उदयनारायण साह, बलभद्र ठाकुर, श्यामाचरण पत्रलेख, नीलकंठ पोद्दार ने पंडाल बना कर सर्वप्रथम मां दुर्गा की भक्ति भाव से पूजा-अर्चना की.
कालांतर में वहां पर सारवां वासियों के सहयोग से मंदिर का निर्माण कराया गया, जहां नियमित रूप से पूजा की जा रही है. वर्तमान में बादल पत्रलेख की अध्यक्षता में सचिव नरेश वर्मा, उपाध्यक्ष संजय राय, पंडित हृदय झा आदि के सहयोग से भव्य पूजा का आयोजन किया जाता है. इस वर्ष यहां तिरुपति मंदिर की तर्ज पर पंडाल का निर्माण किया जा रहा है.
वहीं, बंगाल के मूर्तिकला के कारीगर प्रतिमा का निर्माण कर रहे हैं. पूजा के अवसर पर अष्टमी तिथि को मां की आरती त्रिपुरसुंदरी शृंगार सेवा समिति द्वारा की जाती है. इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु बढ़-चढ़ कर भाग लेते हैं. सप्तमी अष्टमी को यहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है.
एकादशी को मां का विसर्जन किया जाता है.
सारवां : प्रखंड क्षेत्र के दुखियानाथ महादेव मंदिर प्रांगण में 1981 से सार्वजनिक वैष्णवी दुर्गा पूजा समिति द्वारा मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करायी जा रही है. इस संबंध में जानकारी देते हुए पूजा समिति के सचिव नरेश वर्मा व उपाध्यक्ष संजय राय ने बताया कि सन् 1981 में पंडित शिवनारायण पत्रलेख, पवन झा, पूर्णानंद ठाकुर, कृष्णमोहन पत्रलेख, परमेश्वरी वर्मा, उदयनारायण साह, बलभद्र ठाकुर, श्यामाचरण पत्रलेख, नीलकंठ पोद्दार ने पंडाल बना कर सर्वप्रथम मां दुर्गा की भक्ति भाव से पूजा-अर्चना की. कालांतर में वहां पर सारवां वासियों के सहयोग से मंदिर का निर्माण कराया गया, जहां नियमित रूप से पूजा की जा रही है.
वर्तमान में बादल पत्रलेख की अध्यक्षता में सचिव नरेश वर्मा, उपाध्यक्ष संजय राय, पंडित हृदय झा आदि के सहयोग से भव्य पूजा का आयोजन किया जाता है. इस वर्ष यहां तिरुपति मंदिर की तर्ज पर पंडाल का निर्माण किया जा रहा है. वहीं, बंगाल के मूर्तिकला के कारीगर प्रतिमा का निर्माण कर रहे हैं. पूजा के अवसर पर अष्टमी तिथि को मां की आरती त्रिपुरसुंदरी शृंगार सेवा समिति द्वारा की जाती है. इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु बढ़-चढ़ कर भाग लेते हैं. सप्तमी अष्टमी को यहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है. एकादशी को मां का विसर्जन किया जाता है.
