देवघर : मोहनपुर प्रखंड देवघर-गोड्डा मुख्य पथ स्थित मोहनपुर रानी तालाब के ठीक सामने करीब 150 एकड़ जमीन 25 वर्षों बाद परती रह गयी. इस 150 एकड़ जमीन पर सिंचाई के अभाव में खेती नहीं हो पायी. इसमें लक्ष्मीपुर इस्टेट समेत अन्य किसानों की जमीन शामिल है. लक्ष्मीपुर इस्टेट की जमीन भी लंबे अर्से बाद पानी के अभाव में खाली रह गया.
खाली पड़ी यह जमीन खासपालक, चकरमा समेत आसपास के मौजा में है. मोहनपुर के पूर्व मुखिया केदारनाथ गुप्ता बताते हैं कि करीब 25 वर्ष पहले भी बारिश नहीं होने से कुछ इसी तरह जमीन खाली रह गयी थी, उस समय तालाबों में भी पानी का अभाव था. इस इलाके में 150 एकड़ जमीन पर हजारों क्विंटल धान की पैदावार है. इससे सैकड़ों की संख्या में मजदूरों को काम मिलता था, कई किसानों को इस धान से पूरे एक वर्ष के भोजन की व्यवस्था हो जाती थी. अब इस सुखाड़ की वजह से किसान व मजदूरों को बेबस होना पड़ेगा.
नाला टूटने से खेतों तक नहीं पहुंचता पानी
चकरमा के रहने वाले राजेश गुप्ता ने कहा कि इन खेतों के ऊपरी इलाके में दो तालाबों में लबालब पानी है. तालाब का जीर्णोद्धार भी जिला परिषद द्वारा करायी गयी है, इसमें पर्याप्त पानी भी है. इन तालाबों से 150 एकड़ जमीन में फसलों की सिंचाई के लिए सिंचाई नाला था, जिससे सालों भर सिंचाई कर खेती होती थी.
लेकिन 2008 में तेज बारिश यह कच्चा नाला टूट गया, जिससे खेतों तक तालाब का पानी नहीं पहुंचने लगा. श्री गुप्ता ने कहा कि अगर इस कच्चे नाले को सरकारी फंड से पक्का बना दिया जाता तो आज 150 एकड़ जमीन परती नहीं रहती, यहां खेतों में सालों भर हरियाली रहती. उपमुखिया केली देवी ने कहा कि सांसद व विधायक से इस कच्चे नाले के निर्माण की मांग रखी जायेगी.
