देवघर : फर्जी कागजात के आधार पर अलग-अलग दो कंपनियों द्वारा 48 करोड़ के जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) लाभ लेने के मामले की जांच अब एसआइटी करेगी. मामले की जांच के लिए एसपी नरेंद्र कुमार सिंह ने एसआइटी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) गठित की है. एसआइटी में डीएसपी मुख्यालय राजकिशोर सहित साइबर डीएसपी नेहा बाला, नगर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर विनोद कुमार, केस के आइओ दिलीप दास के अलावे कांडों के सूचक सेल्स टैक्स अधिकारी विशाल लकड़ा व शैलेश श्रीवास्तव को शामिल किया गया है.
एसआइटी राज्य भर के अलग-अलग जिलों में दर्ज कांडों से संबंधित जानकारी लेगी व कंपनियों के पते पर जांच-पड़ताल करेगी. जिन व्यवसायियों पर मामले दर्ज हुए हैं, उनलोगों के बारे में जानकारी एकत्र कर वारंट लेगी व गिरफ्तारी के लिए छापेमारी करेगी. बंपास टाउन में संचालित ओम ट्रेडिंग द्वारा धोखाधड़ी कर 24 करोड़ रुपये आइटीसी की हेराफेरी किये जाने के मामले में प्रोपराइटर रोहित सिंह को आरोपित बनाया गया है.
यह मामला राज्यकर पदाधिकारी शैलेश कुमार श्रीवास्तव ने मई माह में नगर थाने में दर्ज कराया था. जिक्र है कि ओम ट्रेडिंग के टिन नं व जीएसटी नं की जांच में पदाधिकारियों को प्रथमद्रष्टया यह संदेहास्पद लगा. व्यवसाय स्थल व आवासीय पते की जांच किये जाने पर गलत निकला. विशेष शाखा से इसकी जांच कराये जाने पर व्यवसायी रोहित सिंह का पता साहिल परिषद स्ट्रीट शोभा बाजार कोलकाता-6 पाया गया. पाया गया कि ओम ट्रेडिंग के प्रोपराइटर द्वारा अपराधिक षड्यंत्र कर जाली कागजातों के आधार पर फर्जी कंपनी का निबंधन किया गया.
इससे 244565620 रुपये आइटीसी की हेराफेरी हुई है. देवघर अंचल के ही राज्य कर पदाधिकारी विशाल लकड़ा ने बृजबिहारी लेन के पते पर रजिस्टर्ड साहा इंटरप्राइजेज के विरुद्ध 24, 46, 47, 612 रुपये आइटीसी हेराफेरी किये जाने का दूसरा एफआइआर जून माह में नगर थाने में दर्ज कराया. मामले में कंपनी के प्रोपराइटर मोती साव समेत मकान मालिक बृजबिहारी लेन निवासी सुनील पांडेय को आरोपित बनाया है.
सीडीआर में मोबाइल नंबर देख पुलिस ने धनंजय को बुलाया था पूछताछ के लिए
रविवार को सेल्स टैक्स लिपिक धनंजय कुमार को इसलिए नगर थाना बुलाकर पूछताछ की गयी, क्योंकि सीडीआर में उसका नंबर देखा गया. पुलिस को उसने साफ शब्दों में बता दिया कि विभागीय पदाधिकारियों ने कागजात खंगाला था तो उसमें एक व्यवसायी का मोबाइल नंबर मिला था. उस नंबर पर पदाधिकारियाें ने भी अपने नंबर से कॉल लगाया.
नहीं लगा तो उसे भी लगाने कहा. पदारधिकारी के कहने पर उसने अपने मोबाइल से उक्त् व्यवसायी को कॉल लगाया था, जिसमें एक मिनट के करीब बात हुई थी. सेल्स टैक्स का नाम सुनकर अगले ने कॉल काट दिया था. इसके बाद दोबारा उसके नंबर पर कभी कॉल नहीं लगा था. उक्त पदाधिकारी को भी कॉल कर पुलिस ने सत्यापन कर लिया है. पुलिस को धन्नंजय से पूछताछ में अन्य कोई साक्ष्य भी नहीं मिले हैं.
