देवघर : फर्जी कागजात के आधार पर अलग-अलग दो कंपनियों द्वारा 48 करोड़ के जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) लाभ लेने के मामले में पुलिस की जांच तेज हो गयी है. रविवार को सेल्स टैक्स लिपिक धनंजय कुमार को नगर थाना बुलाया गया. यहां थाना प्रभारी के कक्ष में एसडीपीओ विकास चंद्र श्रीवास्तव, साइबर डीएसपी नेहा बाला व नगर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर विनोद कुमार ने करीब एक घंटे तक धन्नंजय से पूछताछ की.
इस दौरान पूछताछ में पुलिस को क्या हासिल हुआ, यह बताने से उक्त सभी पुलिस पदाधिकारियों ने इन्कार कर दिया. बाद में धनंजय को पीआर लिखाकर थाने से छोड़ा गया. जिसमें जिक्र है कि पुलिस उन्हें जब भी पूछताछ के लिए बुलायेगी तब थाना आना पड़ेगा.
प्रोपराइटर रोहित सिंह को बनाया गया है आरोपित
बंपास टाउन में संचालित ओम ट्रेडिंग द्वारा धोखाधड़ी कर 24 करोड़ रुपये आइटीसी की हेराफेरी किये जाने के मामले में प्रोपराइटर रोहित सिंह को आरोपित बनाया गया है. यह मामला राज्यकर पदाधिकारी शैलेश कुमार श्रीवास्तव ने मई माह में नगर थाने में दर्ज कराया था. जिक्र है कि ओम ट्रेडिंग के टिन नं व जीएसटी नं की जांच में पदाधिकारियों को प्रथम द्रष्टया यह संदेहास्पद लगा.
व्यवसाय स्थल व आवासीय पते की जांच किये जाने पर गलत निकला. विशेष शाखा से इसकी जांच कराये जाने पर व्यवसायी रोहित सिंह का पता साहिल परिषद स्ट्रीट शोभा बाजार कोलकाता-6 पाया गया. पाया गया कि ओम ट्रेडिंग के प्रोपराइटर द्वारा अपराधिक षड्यंत्र कर जाली कागजातों के आधार पर फर्जी कंपनी का निबंधन किया गया. इससे 244565620 रुपये आइटीसी की हेराफेरी हुई है.
देवघर अंचल के ही राज्य कर पदाधिकारी विशाल लकड़ा ने बृजबिहारी लेन के पते पर रजिस्टर्ड साहा इंटरप्राइजेज के विरुद्ध 24, 46, 47, 612 रुपये आइटीसी हेराफेरी किये जाने का दूसरा एफआइआर जून माह में नगर थाने में दर्ज कराया. मामले में कंपनी के प्रोपराइटर मोती साव समेत मकान मालिक बृजबिहारी लेन निवासी सुनील पांडेय को आरोपित बनाया है.
