देवघर : सरकार के फैसले के बाद पिछले तीन वर्षों में जिले के प्राइमरी स्कूलों में 20 से कम छात्रों की उपस्थिति, निर्धारित से कम परिधि में स्कूलों को खोले जाने को गंभीरता से लेते हुए 184 स्कूलों को मर्ज कर दिया गया है. मर्ज किये गये स्कूलों के छात्रों का नामांकन नजदीक के स्कूलों में कर दिया गया. यहीं नहीं शिक्षकों को भी नजदीक के स्कूलों में शिफ्ट कर दिया गया है.
छात्रों की उपस्थिति कम होने, पांच सौ मीटर के दायरे में चल रहे स्कूलों को बंद करने के बाद निर्धारित 184 स्कूलों के 552 कमरे बेकार हो गये हैं. विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो एक स्कूल में औसतन चार कमरे हैं. किसी-किसी में तीन कमरे व दो कमरे भी हैं. एक स्कूल भवन के निर्माण करने पर औसतन 10 लाख रुपये खर्च किये गये थे, लेकिन छात्र-छात्राओं के अभाव में शैक्षणिक वर्ष 2018 में प्रथम चरण में छह स्कूल तथा दूसरे चरण में 156 स्कूलों को मर्ज किया गया था.
यही नहीं इससे पहले वर्ष 2016 में 22 स्कूलों को मर्ज किया गया था. विभागीय पदाधिकारी कि माने तो सरकार ने गुणवत्तापूर्ण पठन-पाठन के अलावा योजनाओं का लाभ छात्रों को समुचित तरीके से उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्कूलों को मर्ज करने का फैसला लिया था.
स्कूलों में बच्चों की भीड़ बढ़ी, शिक्षकों की तंगी : निर्धारित मापदंड को पूरा नहीं करने वाले स्कूलों को बंद कर दिया गया है. वर्तमान में ताला लटका हुआ है. लेकिन, जिस स्कूलों के साथ मर्ज स्कूलों को टैग किया गया है. वहां बच्चों की उपस्थिति बढ़ गयी है. स्कूलों की औसतन उपस्थिति में भी सुधार हुआ है. लेकिन, बच्चों की उपस्थिति के अनुपात में शिक्षकों की तंगी अब भी बरकरार है.
क्या कहते हैं डीएसइ
सरकार के निर्देशानुसार निर्धारित मापदंड पूरा नहीं करने वाले स्कूलों को मर्ज कर दिया गया है. वर्ष 2016 से अबतक 184 स्कूलों को मर्ज किया गया है. शिक्षकों को भी दूसरे स्कूलों में शिफ्ट कर दिया गया है. मर्ज किये गये स्कूलों का भवन खाली पड़ा हुआ है. विभागीय निर्देश के तहत आगे काम किया जायेगा.
– सीवी सिंह, जिला शिक्षा अधीक्षक, देवघर
