संजीव मिश्रा, देवघर. बाबा बैद्यनाथ के दरबार में सच्चे मन से की गयी प्रार्थना पूरी होने की मान्यता श्रद्धालुओं को हर साल यहां खींच लाती है. श्रावणी मेले में आस्था के ऐसे कई रंग देखने को मिलते हैं, लेकिन कांवरिया पथ पर इन दिनों एक परिवार की यात्रा श्रद्धालुओं के बीच खास चर्चा का विषय बनी हुई है. पटना के फुलवारी शरीफ निवासी पिंटू कुमार और उनकी पत्नी ब्यूटी कुमारी अपने मासूम बेटे आनंद माधव को कांवर में बैठाकर सुल्तानगंज से देवघर पहुंचे हैं. करीब 12 वर्षों की प्रतीक्षा के बाद संतान का सुख मिलने पर दंपती ने बाबा बैद्यनाथ के प्रति आभार जताते हुये अपना संकल्प पूरा किया.
कांवर के आगे वाले हिस्से में मासूम आनंद माधव बैठा है, जबकि उसके माता-पिता और परिजन गंगाजल लेकर बाबा नगरी की ओर बढ़ते नजर आए. बच्चे की मासूम मुस्कान और माता-पिता की श्रद्धा भरी आंखें कांवरिया पथ से गुजरने वाले लोगों को भावुक कर रही हैं. कई श्रद्धालु इस अनोखे दृश्य को कुछ देर रुककर देखते नजर आये.
12 साल तक मांगी संतान की मन्नत
पिंटू कुमार ने बताया कि उन्होंने लंबे समय तक बाबा बैद्यनाथ से संतान की कामना की थी. करीब 12 वर्षों के इंतजार के बाद उनके घर बेटे का जन्म हुआ. उन्होंने बेटे का नाम आनंद माधव रखा. पिंटू के अनुसार, उन्होंने उसी समय संकल्प लिया था कि बाबा की कृपा से संतान होने पर वह अपने बेटे को कांवर में बैठाकर सुल्तानगंज से देवघर लायेंगे और बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करायेंगे.
अब बेटे के साथ बाबा धाम पहुंचकर दंपती ने वर्षों पुराना अपना संकल्प पूरा किया है. इस यात्रा में परिवार और रिश्तेदार भी उनके साथ हैं.
थकान के बावजूद नहीं रुके कदम
पिंटू ने बताया कि कांवर में बच्चे को लेकर पैदल यात्रा करना आसान नहीं था. रास्ते में कई बार थकान हुयी और पैर जवाब देने लगे, लेकिन बाबा के प्रति आस्था ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी. करीब 25 किलोमीटर की यात्रा के दौरान जब भी मुश्किलें आयीं, परिवार के सदस्यों ने एक-दूसरे का सहारा लिया.
वहीं. मां ब्यूटी कुमारी ने कहा कि जिस बच्चे के लिए वर्षों तक बाबा से प्रार्थना की, आज उसी बच्चे को कांवर में लेकर बाबा के दरबार तक पहुंचना उनके लिए बेहद भावुक और सुखद अनुभव है. उन्होंने कहा कि वह बेटे को बड़ा होने पर उसकी जन्म की कहानी और बाबा बैद्यनाथ के प्रति परिवार की आस्था के बारे में जरूर बतायेंगी.
आस्था के साथ कृतज्ञता की यात्रा
पिंटू और ब्यूटी के लिए यह महज कांवर यात्रा नहीं, बल्कि 12 वर्षों के इंतजार, विश्वास और मनोकामना पूरी होने के बाद बाबा बैद्यनाथ के प्रति कृतज्ञता जताने का अवसर है. कांवरिया पथ पर इस परिवार को देखकर श्रद्धालु भी भावुक हो रहे हैं. बेटे को कांवर में बैठाकर बाबा के दरबार तक पहुंचता यह परिवार श्रावणी मेले में आस्था और विश्वास की एक भावुक तस्वीर पेश कर रहा है.
