मधुपुर : पिछले कुछ सालों से साइबर ठगी कर दूसरे की गाढ़ी कमाई से अपनी जेब भरने का धंधा जोरों से चला है. देश के लगभग हर राज्य की पुलिस साइबर ठगों की तलाश में देवघर व जामताड़ा आ रही है. लेकिन, कुछ एक गांव ऐसे भी हैं जहां आर्थिक स्थिति सुधारने व गांव के विकास के लिए योजनाआें पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा है. इन गांवों के युवा साइबर ठगी के माध्यम से दूसरों को चूना लगा रहे हैं और इन पैसों से ऐश-मौज कर रहे हैं.
साथ ही संलिप्त लोगों ने आलीशान मकान भी बना रखी है. ऐसे युवाओं को उनके परिजनों का भी संरक्षण प्राप्त है, जो उन्हें गलत करने से भी नहीं रोकते. इन्हें पकड़ने अगर पुलिस भी पहुंची तो उनपर सभी ग्रामीण हमला कर देते हैं. घर बैठे-बैठे लोगों के बैंक खाता से पैसा उड़ाना काफी आसान काम नजर आता है. जिस कारण पुलिस भी इन गांवों में आने से कतराती है.
तीन बार पुलिस पर हुआ हमला
साइबर अपराधी की तलाश में गयी पुलिस टीम पर कई बार जग्गाडीह में हमला हो चुका है. इस आशय को लेकर तीन बार अलग अलग मामला भी दर्ज किया गया है. साइबर अपराध की तलाश में गयी मारगोमुंडा के तत्कालीन थाना प्रभारी जयराम प्रसाद के अलावे करौं के तत्कालीन प्रभारी कैलाश कुमार व दो माह पूर्व साइबर अपराध की तलाश में गयी करौं के वर्तमान थाना प्रभारी दुष्यंत सिंह व मारगोमुंडा के तत्कालीन थाना प्रभारी जगदेव पहान तिर्की की संयुक्त छापेमारी दल पर भी गांव वालों ने हमला कर दिया. वैसे तो गांव में आपसी दुश्मनी व प्रतिस्पर्धा आम बात है. लेकिन, जब भी पुलिस पहुंचती है तो अधिकतर गांव वाले उनके खिलाफ एक हो जाते हैं.
आलीशान मकान व महंगी गाड़ियां
देखते ही देखते पिछले पांच साल में जग्गाडीह गांव की पूरी तस्वीर बदल गयी. गांव में करीब सवा सौ घर हैं. इसकी आबादी सात-आठ सौ है. पांच वर्ष पूर्व अधिकतर घर पुआल व खपरैल के हुआ करते थे. लेकिन जैसे-जैसे साइबर अपराध का पैसा पहुंचने लगा. लोगों का रहन-सहन ही बदल गया. यहां करीब 50 नये ढलाई घर बन गये है. अब भी कई घर बन रहे हैं. 150 से अधिक कीमती बाइक भी नजर आ जायेंगे. जिसमें बुलेट से लेकर अन्य महंगी बाइक शामिल हैं. यहां तक कि बोलेरो, स्काॅर्पियो, ट्रैक्टर व मालवाहक वाहनों की भी भरमार हो गयी. कई लोगों ने जमीन समेत अन्य संपत्ति में भी साइबर अपराध का पैसा लगा दिया. हालांकि, इनमें से कुछ घर ऐसे भी हैं जिन्होंने अपनी मेहनत व लगन से यह सब हासिल किया है. लेकिन, साइबर क्राइम के दाग ने इन ग्रामीणों की छवि भी धूमिल की है.
हर आयोजन पर पैसों की बारिश
गांव में भी किसी के घर में जन्मदिन हो या शादी, फिर चाहे श्राद्ध यहां हर आयोजन का विशाल रूप देखने को मिलता है. ऐसे मौकों पर यहां पैसा पानी की तरह बहता है. गांव में युवाओं का भी साइबर अपराध का प्रशिक्षण स्थानीय स्तर पर मिलने लगा. बीपीएल व पेंशन समेत सरकारी योजनाओं का लाभ भी कई लोग ले रहे हैं. यहां के युवाओं की नियामतपुर में मुजरों की महफिल की भी शोभा बढ़ाना आम बात हो गयी.
भाड़े के एटीएम व सिम का प्रयोग
साइबर थाना खुलने व अब अत्यधिक सख्ती बरते जाने के बाद साइबर अपराधियों ने अपना तरीका भी बदल दिया है. कईयों ने अपना पुराना बैंक खाता बंद करा दिया है. भाड़े के एटीएम व भाड़े का बैंक खाता इस्तेमाल साइबर अपराधी कर रहे है. सिम कार्ड भी गरीब के नाम से खरीदा जाता है. जिन्हें बीपीएल या पेंशन दिलाने का लालच लेकर आधार कार्ड व फोटो ये लोग अपने पास ले लेते हैं. फिर ठगी के पैसे इन्हीं खातों में मंगाते हैं या फिर ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं.
शाम ढलते ही रंगीला मोड़ पर लगने लगता जमघट
गांव में ही एक चौराहे को रंगीला मोड़ कहा जाता है. जहां प्रत्येक दिन शाम होते ही बड़े-बड़े बाजारों जैसी तड़क भड़क देखने को मिलती है. फास्ट फूड हो या शराब सब कुछ आसानी से उपलब्ध है. शाम को यहां युवाओं का जमावड़ा लगा रहता है.
कई राज्यों की पुलिस की छापेमारी
बढ़ते साइबर अपराध के बाद स्थानीय थाना की पुलिस टीम ने भी छापेमारी की. इसके अलावा छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली समेत कई राज्यों की पुलिस टीम भी साइबर अपराधी के तलाश में गांव पहुंची. हालांकि, थाना में साइबर अपराधियों का रिकार्ड विस्तृत नहीं रहने के कारण बहुत ज्यादा कामयाबी पुलिस को नहीं मिल पायी. लेकिन, पुलिस ने जब-जब साइबर ठगों की तलाश में छापेमारी की, पुलिस को लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा.
