देवघर : प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत फ्री में छह अगस्त तक धान की फसल का बीमा कराने की अंतिम तिथि थी. देवघर में डेढ़ लाख किसानों का फसल बीमा कराने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन विभागीय अधिकारियों की अनदेखी की वजह से महज 70 हजार किसानों का ही फसल बीमा हो पाया. बगैर प्रीमियम के फ्री में लक्ष्य से 50 फीसदी बीमा भी विभाग नहीं करा पायी.
राज्य सरकार ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया था कि गांवों व पंचायतों में कैंप लगाकर फसल बीमा करायें. इसके लिए 31 जुलाई से तिथि को बढ़ाकर छह अगस्त की गयी. पहले तो प्रीमियम शुल्क रहने की वजह से 10 फीसदी किसानों ने भी बीमा नहीं कराया था. सरकार ने प्रीमियम शुल्क हटाकर विभागीय अधिकारियों को जिम्मेवारी दी थी कि कैंप कर लक्ष्य के अनुसार फसल बीमा करायें, बावजूद आंकड़ा बेहतर करने में विभाग पीछे रह गया.
फसल बीमा अधिक से अधिक कराने के लिए प्रत्येक प्रखंड में बीसीओ को पर्यवेक्षक के रूप में प्रतिनियुक्त किया गया था. एआर ऑफिस के कर्मियों को लगाया गया था, लेकिन अधिकांश पदाधिकारी व कर्मी श्रावणी मेला की ड्यूटी का हवाला देकर फसल बीमा करने में पीछे रह गये. देवघर में बारिश से अभाव में 55 फीसदी भी रोपनी नहीं हो पायी है. अगर लक्ष्य के अनुसार सभी किसानों की फसल का बीमा होता तो उन्हें आने वाले में समय में बीमा का लाभ मिल सकता था.
20 फीसदी किसानों को ही मिला केसीसी ऋण
देवघर. इस वर्ष अभी तक बारिश कम होने की वजह से जिले में खरीफ फसल की स्थिति बेहद खराब है.
कृषि विभाग की रिपोर्ट के अनुसार 55 फीसदी रोपनी देवघर में हुई है. किसानों को जोरिया व कुआं से पम्पसेट के जरिये खेतों में पानी डालकर रोपनी करना पड़ रहा है. ऐसी परिस्थिति में किसानों को केसीसी ऋण देने में बैकों ने रुचि नहीं दिखायी है. संकट की घड़ी में बैंकों ने समय पर खेती करने के लिए किसानों को केसीसी ऋण नहीं दिया है.
जिले के 26 बैकों को डीएलसीसी की बैठक के बाद 35,700 किसानों के बीच केसीसी ऋण वितरण का लक्ष्य दिया गया था, इसमें 20 फीसदी यानि 6,577 किसानों के बीच ही केसीसी ऋण दिया गया. 30 जून की रिपोर्ट के अनुसार अधिकांश बैकों ने एक भी किसानों को ऋण नहीं दिया गया. 6,577 किसानों के बीच 28 लाख रुपये का ऋण दिया गया.
