सारठ : मिश्राडीह गांव के गरीब किडनी बीमारी से ग्रसित सुरेश पंडित ने सरकारी मदद की आस में मंगलवार को दम तोड़ दिया. सुरेश को किडनी खराब थी. व्यवस्था की संवदेनहीनता की हद तो देखिए, मुख्यमंत्री के आदेश के बाद भी असाध्य बीमारी से पीड़ित सुरेश के इलाज का मामला सरकारी फाइलों में उलझा रह गया.
बता दें कि प्रभात खबर में सुरेश की खबर प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद एक सुधी पाठक शेखर सुमन ने मुख्यमंत्री के ट्विटर हैंडल पर ट्वीट कर सुरेश के इलाज के लिए आर्थिक सहायता दिलाने का अनुरोध किया था. इस पर मुख्यमंत्री रघुवर दास ने हर संभव सहायता का आश्वासन दिया था. सुरेश पंडित की तबीयत बिगड़ती गयी. स्थानीय लोगों की पहल पर सुरेश चंडीगढ़ भी गया परंतु वहां भी पैसे की कमी के कारण वापस आ गया.
मुख्यमंत्री असाध्य बीमारी राहत कोष मदद का अाश्वासन मिला. इसके बाद कृषि मंत्री रणधीर सिंह के सहयोग से मेदांता में भर्ती कराया गया. सुरेश का वहां कुछ दिन इलाज भी किया गया तथा मेदांता द्वारा सुरेश के इलाज के लिए 5,32,260 रुपये का प्राक्कलन बना कर दिया गया. सुरेश ने जिला सिविल सर्जन कार्यालय को प्राक्कलन दिया. सिविल सर्जन कार्यालय द्वारा सुुरेश को एक पत्र ज्ञापांक संख्या 1071 दिनांक 30 मई 18 को भेजकर बताया गया कि तत्काल इलाज के लिए 2,50,000 रुपये पारित कर दिया है.
उक्त पत्र मेदांता रांची के नाम से निर्गत था, जिसमें सीएस देवघर ने अधीक्षक मेदांता को तत्काल इलाज करने का आदेश दिया था. पत्र मिलने के बाद भी मेदांता द्वारा एक बार सुरेश का डायलिसिस किया गया और कहा कि जब तक पैसे नहीं आएंगे तब तक इलाज नहीं हो पायेगा. सुुरेश के भाई रंजीत पंडित ने बताया कि मेदांता के साहब ने उससे कहा कि पैसे
आयेंगे तभी इलाज होगा. डायलिसिस का बिल मांगा तो कहा गया कि ये सरकारी पैसे का हिसाब देने की आवश्यकता नहीं है, बाद में आना. मुख्यमंत्री का अादेश सरकारी पेच में उलझकर रह गया और इधर, सुरेश की मंगलवार को मौत हो गयी.
