जलाशय के बगैर जलापूर्ति योजना !
देवघर : झारखंड बने 17 साल हो गये. लेकिन इन 17 सालों में देवघर शहरी क्षेत्र के लोगों को शुद्ध पेयजल तक नसीब नहीं हो पाया है. ऐसा नहीं है कि इसके लिए सरकार ने प्रयास नहीं किया. देवघर शहर के लोगों को सप्लाई वाटर देने के लिए 46 करोड़ की लागत से शहरी जलापूर्ति योजना बनी. लेकिन 46 हजार लोगों को भी इस जलापूर्ति योजना से पानी नहीं मिल पाया है. जलापूर्ति योजना के लिए पानी कहां से आयेगा, इसकी प्लानिंग ही नहीं हुई. उसी तरह 68 करोड़ की लागत से मधुपुर शहरी जलापूर्ति योजना को स्वीकृति मिली है. लेकिन इस योजना को पानी कहां से मिलेगा, इस बारे में भी सोचा ही नहीं गया. इसलिए लोगों को अंदेशा है कि कहीं देवघर की तरह पैसा खर्च होने के बाद भी मधुपुर प्यासा नहीं रह जाये.
देवघर को चाहिए पुनासी व बुढ़ई जलाशय : मिली जानकारी के मुताबिक, मधुपुर शहरी जलापूर्ति योजना के लिए बुढ़ई जलाशय योजना का पूरा होना जरूरी है. लेकिन अभी तक इस दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं हो पायी है. हालांकि मुख्यमंत्री रघुवर दास ने राज्य की 10 सिंचाई योजनाओं को पूरा करवाने के लिए केंद्र से मदद मांगी है, जिसमें बुढ़ई भी शामिल है. एक अच्छी बात यह है कि बुढ़ई जलाशय के लिए तो उन्होंने फॉरेस्ट क्लियरेंस का प्रस्ताव भी केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेज दिया है. यदि केंद्र सरकार बुढ़ई योजना को क्लियरेंस दे देती है तो मधुपुर शहरी जलापूर्ति योजना के लिए यह वरदान साबित होगा. इसी तरह देवघर शहरी जलापूर्ति योजना के लिए पुनासी जलाशय योजना का पूरा होना बहुत जरूरी है. क्योंकि देवघर शहरी जलापूर्ति योजना तो तैयार हो गयी है लेकिन पानी ही नहीं है. ऐसे में जल संकट दूर करने के लिए सरकार को पहले पुनासी जलाशय योजना और बुढ़ई जलाशय योजना का पूरा करवाना होगा. इन दोनों जलाशय को तैयार हुए बिना देवघर जिले की दोनों शहरी जलापूर्ति योजना सक्सेस नहीं हो सकती है.
करोड़ों खर्च के बाद…
नदियों में नहीं रहता पानी
अजय नदी हो या पतरो नदी दोनों में ही बरसात के दिनों में ही पानी रहता है. शेष दिनों में पानी नहीं के बराबर रहता है. अजय नदी के नवाडीह घाट पर तो दो दर्जन से अधिक रिवर बेस्ड हाइडीप बोरिंग करायी गयी है, जिससे शहरी जलापूर्ति योजना को पानी मिलता है. ठंड के दिनों में तो किसी तरह जलापूर्ति हो जाती है. लेकिन गरमी के दिनों में यहां से भी पानी नहीं निकल पाता है. नदी का जलस्तर काफी नीचे चला जाता है. हर साल पांच से छह फीट जल स्तर नीचे जा रहा है. नतीजा है कि गरमी में तो पांच-पांच दिन तक वाटर सप्लाइ बाधित हो जाती है. एक या दो दिन गैप में वाटर सप्लाई होता है. हर गरमी में रेगूलर पानी देने में एचइडी हाथ खड़े कर देता है. यही कारण है कि देवघर शहरी क्षेत्र में आधी आबादी को भी शहरी जलापूर्ति योजना से पानी नहीं मिल पाता है. जबकि देवघर शहरी इलाके की आबादी तकरीबन दो लाख से अधिक है. ऐसे में मधुपुर शहरी जलापूर्ति योजना के सक्सेस होने के सभी विकल्पों पर पहले से ही विचार कर लेना जरूरी है.
देवघर शहरी जलापूर्ति योजना पर 46 करोड़ खर्च करने के बाद अब मधुपुर के लिए 68 करोड़ की योजना स्वीकृत
देवघर में 46 हजार लोगों को भी नहीं मिला पानी
अब मधुपुर शहरी जलापूर्ति के लिए बनी 68 करोड़ की योजना
शहर को पानी के लिए चाहिए पुनासी व बुढ़ई जलाशय से पानी
देवघर में गरमी के दिनों में हाथ खड़े कर देता है पीएचइडी
देवघर को है पुनासी जलाशय योजना के पूरा होने का इंतजार
मुख्यमंत्री की पहल : बुढ़ई जलाशय योजना के फॉरेस्ट क्लियरेंस का भेजा प्रस्ताव
