सारठ: सारठ प्रखंड में पदस्थापित पंचायत सचिव छोटेलाल यादव पिछले छह माह से प्रशासनिक उपेक्षा का दंश झेल रहा है. इस बाबत बताया कि 22 जनवरी 2017 को शिमला पंचायत में आयोजित जनता दरबार की पंचायत सचिव ने सही प्रकार से व्यवस्था नहीं की थी. जिसको लेकर जनता दरबार में कृषि मंत्री के द्वारा शिमला […]
सारठ: सारठ प्रखंड में पदस्थापित पंचायत सचिव छोटेलाल यादव पिछले छह माह से प्रशासनिक उपेक्षा का दंश झेल रहा है. इस बाबत बताया कि 22 जनवरी 2017 को शिमला पंचायत में आयोजित जनता दरबार की पंचायत सचिव ने सही प्रकार से व्यवस्था नहीं की थी. जिसको लेकर जनता दरबार में कृषि मंत्री के द्वारा शिमला पंचायत सचिव पर कार्रवाई का निर्देश दिया था. मंत्री के निर्देश पर बीडीओ निशा कुमारी सिंह ने पंचायत सचिव से कार्यलय पत्रांक 157/वि दिनांक 25फरवरी 2017 के द्वारा शोकॉज किया था.
जिसमें पंचायत सचिव पर आरोप लगाया गया कि जनता दरबार मे प्रोटोकॉल के तहत समुचित व्यवस्था नहीं की गयी. जिस कारण प्रखंड कार्यालय की छवि धूमिल हुई. साथ ही कृषि मंत्री एवं उपायुक्त के द्वारा इस कुव्यस्था को लेकर प्रतिकूल टिप्पणी की गयी. उक्त आरोपों को लेकर बीडीओ ने 24 घंटे में जवाब मांगा था.
साथ ही उसी दिन कार्यालय आदेश संख्या 04/2017 ज्ञापांक 159/वि दिनांक 25 जनवरी 2017 के द्वारा ही उक्त पंचायत सचिव को शिमला पंचायत के कार्य से मुक्त करते हुए प्रखंड कार्यालय में योगदान देने का निर्देश दिया. उक्त पंचायत का प्रभार जमुवासोल पंचायत के पंचायत सचिव सुबल मंडल को दो दिनों के अंदर सौंपने का निर्देश दिया. इधर, पंचायत सचिव का कहना है कि 22 जनवरी को शिमला एवं ठाडी दोनो पंचायतों का जनता दरबार था. जिसमें दोनों पंचायतों के मुखिया व पंचायत सचिव को उक्त व्यवस्था करनी थी. जनता दरबार की समुचित व्यस्था करने में राशि खर्च करने का कोई निर्देश नहीं है. दो पंचायतों कीे जनता दरबार में सिर्फ मुझ पर ही कार्रवाई की गयी. छह महीने से मूल कार्य से मुक्त कर दिया गया है.
बोले अिधकारी
डीपीआरओ मिथिलेश कुमार राम ने कहा कि व्यवस्था नहीं की गयी तो पंचायत सेवक दोषी हैं. अगर एकतरफा कार्रवाई की गयी तो गलत हुआ है.
डीडीसी जनमेजय ठाकुर ने कहा कि मामला संज्ञान में नहीं आया है. इसे देखते हैं. किसी के साथ अन्याय नहीं हो.