High-Risk Pregnancy: झारखंड में हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी का खतरा केवल आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं तक सीमित नहीं है. साधन-संपन्न और उच्च वर्ग की महिलाओं में भी गर्भावस्था के दौरान कई तरह की जटिलताएं सामने आ सकती हैं. विशेषज्ञों के अनुसार देर से शादी, अधिक उम्र में गर्भधारण, मोटापा और डायबिटीज इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं. इससे गर्भवती महिला के साथ-साथ गर्भ में पल रहे बच्चे के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है.
झारखंड में 29.2 प्रतिशत महिलाएं कम वजन की हैं, जबकि 16.9 प्रतिशत महिलाएं अधिक वजन की स्थिति में हैं. पोषण की यह दोहरी चुनौती गर्भावस्था के दौरान जटिलताओं का खतरा बढ़ा रही है. ये बातें झारखंड सरकार और चाइल्ड इन नीड इंस्टिट्यूट (सिनी) की ओर से होटल बीएनआर में आयोजित गर्भधारण-पूर्व देखभाल पर राज्यस्तरीय परामर्श ‘प्रारंभ’ परिचर्चा में सामने आयीं.
गर्भधारण से पहले स्वास्थ्य जांच जरूरी
परिचर्चा में गर्भधारण से पहले और गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच पर जोर दिया गया. विशेषज्ञों ने कहा कि समय पर बीमारी की पहचान और सही इलाज से गर्भावस्था से जुड़ी कई गंभीर जटिलताओं को कम किया जा सकता है.
स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने अपने संदेश में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने की जरूरत बताई. कार्यक्रम को एनएचएम के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा, सिनी के चीफ ऑफ प्रोग्राम्स मेघेंद्र बनर्जी, स्त्रीपर्णा घोष मुखर्जी, निदेशक प्रमुख डॉ सिद्धार्थ सान्याल, डॉ समीर नारायण चौधरी, डॉ प्रभात कुमार, यूनिसेफ की डॉ कनिनिका मित्रा, एम्स देवघर के डॉ सोमशेखर निंबालकर, एम्स दिल्ली की डॉ के अपर्णा शर्मा, डॉ जॉय भादुड़ी और अरविंद मसाली सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया.
ये भी पढ़ें- सरकारी डेंटल कॉलेज रिम्स में पहली बार शुरू हुआ एमडीएस कोर्स, स्टेट कोटा की सभी 13 सीटें फुल
एनएफएचएस-6 के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
पैनल डिस्कशन में स्वास्थ्य, पोषण, परिवार नियोजन और किशोर स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रमों को और मजबूत करने पर चर्चा हुई. परिचर्चा में एनएफएचएस-6 (2023-24) के आंकड़े भी रखे गए. आंकड़ों के अनुसार झारखंड में 28 प्रतिशत महिलाओं की शादी 18 वर्ष की उम्र से पहले हो गई थी. वहीं, 11.7 प्रतिशत किशोरियां या तो गर्भवती हैं या मां बन चुकी हैं. विशेषज्ञों ने इसे गंभीर चिंता का विषय बताया. उन्होंने कहा कि गर्भधारण से पहले ही महिलाओं और किशोरियों के स्वास्थ्य, पोषण और जागरूकता पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है.
35 साल के बाद बढ़ जाता है जटिलताओं का खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार 35 वर्ष से अधिक उम्र में गर्भधारण करने पर गर्भावस्था के दौरान कई तरह की जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है. इस उम्र में हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और सी-सेक्शन की संभावना अधिक हो सकती है. वहीं, अधिक वजन और मोटापा भी गर्भावस्था के लिए चुनौती बन सकता है. इससे गर्भकालीन मधुमेह यानी जेस्टेशनल डायबिटीज और प्रीक्लेम्पसिया का खतरा बढ़ सकता है. प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव जैसी समस्या की आशंका भी बढ़ जाती है.
ये भी पढ़ें- रांची में बिना सूचना इंटरनेट सेवा काटने पर HC नाराज, अधिकारियों को लगाई फटकार
कम और अधिक वजन, दोनों चुनौती
विशेषज्ञों ने बताया कि झारखंड में एक ओर बड़ी संख्या में महिलाएं कम वजन की हैं, तो दूसरी ओर अधिक वजन और मोटापे की समस्या भी बढ़ रही है. गर्भधारण से पहले महिला का स्वस्थ वजन और बेहतर पोषण स्थिति में होना जरूरी है. ऐसे में गर्भधारण की योजना बना रही महिलाओं को पहले से स्वास्थ्य जांच, पोषण और वजन पर ध्यान देना चाहिए. इससे गर्भावस्था के दौरान होने वाली जटिलताओं को कम करने में मदद मिल सकती है.
