प्रखंड के कई गांवों में सड़क गड्ढों में तब्दील

कई पंचायतों के ग्रामीण सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं.

लावालौंग. प्रखंड के कई पंचायतों के ग्रामीण सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं. वन्य प्राणी आश्रायणी क्षेत्र होने के कारण सड़क नहीं बनने से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गयी है. प्रखंड के सिलदाग, रिमी, कौलकोले, लावालौंग व हेडुम पंचायत के गांवों में पक्की सड़क नहीं रहने से वाहन का प्रवेश नहीं हो पाता है. ऐसे में लोगों को पैदल मुख्यालय तक आना-जाना पड़ता है. ग्रामीणों के अनुसार कच्ची सड़क होने के कारण हल्की बारिश में सड़क पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो जाती है. चुनाव के वक्त सभी उम्मीदवार सड़क बनाने का आश्वासन देते हैं, लेकिन चुनाव के बाद भूल जाते हैं. कई बार आरइओ विभाग से सड़क बनाने को लेकर टेंडर निकाला गया, लेकिन वन विभाग से एनओसी नहीं मिलने के कारण सड़क नहीं बन पायी. ग्रामीण जितेंद्र ठाकुर, खीरू प्रजापति ने कहा कि वन विभाग खुद काम नहीं करता है और दूसरे को करने भी नहीं देता है. इससे लोगों में नाराजगी है. गांव का विकास नहीं हो रहा है. पदाधिकारी भी गांव नहीं पहुंच पाते हैं. बीमार पड़ने पर लोगों को इलाज के लिए डोली पर टांग प्रखंड मुख्यालय ले जाना पड़ता है. प्रखंड के मुख्य सड़क लावालौंग पांकी की स्थिति काफी जर्जर है. इसके अलावा सिलदाग, कौलकौले पंचायत के सांभे, मड़वा की सड़क गड्ढों में तब्दील हो गया है. जब से वन्य प्राणी आश्रायणी क्षेत्र घोषित हुआ है, गांव का विकास नहीं हो रहा है.

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By ANUJ SINGH

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