टंडवा से बरुण सिंह की रिपोर्ट
चतरा : एनटीपीसी (NTPC) के टंडवा पावर प्लांट से निकलने वाली फ्लाई ऐश (कोयले की राख) का असुरक्षित परिवहन अब स्थानीय ग्रामीणों के लिए मुसीबत बन गया है. टंडवा प्रखंड के कई गांवों के ग्रामीणों ने इस राख से होने वाले वायु प्रदूषण और जनस्वास्थ्य पर पड़ रहे इसके घातक असर को लेकर गहरी चिंता जताई है. ग्रामीणों का साफ कहना है कि फ्लाई ऐश से लदे हाईवा और भारी वाहनों से उड़ने वाली बारीक राख के कारण पूरे क्षेत्र में धूल का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ गया है, जिससे लोगों का जीना मुहाल हो गया है.
बिना ढके दौड़ रहे वाहन
टंडवा, सेरनदाग, खधैया, मिश्रौल, धनगड्डा, राहम और नईपारम सहित आसपास के दर्जनों गांवों के निवासियों ने आरोप लगाया है कि फ्लाई ऐश का परिवहन करने वाले अधिकांश वाहनों को नियम के मुताबिक पूरी तरह तिरपाल से ढंका नहीं जाता. इसके कारण तेज रफ्तार वाहनों से परिवहन के दौरान राख उड़कर सड़क किनारे बसी बस्तियों, घरों और फसलों से लहलहाते खेतों तक पहुंच रही है. आलम यह है कि मुख्य सड़कों पर राख और धूल की मोटी परत जमी रहती है, और जैसे ही कोई वाहन गुजरता है या तेज हवा चलती है, पूरा इलाका डस्ट जोन में तब्दील हो जाता है.
ये भी पढ़ें: 'मंत्री महोदया, सिमडेगा के गांवों को टापू बनने से बचाएं', दीपिका पांडेय सिंह से मिले विधायक भूषण बाड़ा
खांसी, एलर्जी और सांस की बीमारियों की आई बाढ़
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, इस डस्ट पॉल्यूशन की वजह से क्षेत्र में स्वास्थ्य संकट खड़ा हो गया है. गांवों में खांसी और गले में लगातार जलन, आंखों में भारीपन, सांस फूलना और अस्थमा जैसी गंभीर शिकायतें तेजी से बढ़ी हैं. इस जानलेवा प्रदूषण का सबसे ज्यादा शिकार मासूम बच्चे, बुजुर्ग और पहले से फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित लोग हो रहे हैं, जिनका घर से निकलना भी दूभर हो गया है.
"पानी का छिड़काव नहीं हुआ तो आंदोलन": पूर्व मुखिया
मामले पर चिंता जताते हुए क्षेत्र के पूर्व मुखिया प्रयाग राम ने कहा कि सार्वजनिक सड़कों पर नियमों को ताक पर रखकर किया जा रहा फ्लाई ऐश का परिवहन पर्यावरण और जनस्वास्थ्य दोनों के लिए एक बड़ा टाइम बम बन गया है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते एनटीपीसी प्रबंधन और प्रशासन ने प्रभावी कदम नहीं उठाए, तो आने वाले दिनों में स्थिति महामारी जैसी बेहद गंभीर हो सकती है. उन्होंने जिला प्रशासन, झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JSPCB) और एनटीपीसी (NTPC) प्रबंधन से मांग की है कि फ्लाई ऐश परिवहन के दौरान तय किए गए पर्यावरणीय मानकों का कड़ाई से पालन कराया जाए. साथ ही बिना पूरी तरह ढके चल रहे वाहनों पर भारी जुर्माना लगाया जाए. इसके अलावा प्रभावित रूटों और सड़कों पर नियमित रूप से दिन में कई बार पानी का छिड़काव (Water Sprinkling) करने की भी मांग की गई है.
ये भी पढ़ें: मंईयां सम्मान योजना : रांची की 3.66 लाख महिलाओं के खातों में पहुंचे 275 करोड़ रुपये
