कुंदा. प्रखंड के राजागढ़ यज्ञ मंडप के समीप शनिवार को प्रकृति पर्व सरहुल उल्लासपूर्ण माहौल में मनाया गया. मुख्य अतिथि सांसद कालीचरण सिंह व विधायक जनार्दन पासवान ने संयुक्त रूप से कार्यक्रम का शुभारंभ किया. सरना समिति के लोगों ने अतिथियों को अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया गया. संचालन रंजीत भोक्ता व उपेंद्र भोक्ता ने संयुक्त रूप से किया. इस मौके पर सांसद ने कहा कि सरहुल प्रकृति पर्व है. यह हमें पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है. विधायक ने सरहुल पर्व की सभी को बधाई की और लोगों को अधिक से अधिक पौधे लगाने का आह्वान किया, ताकि पर्यावरण सुरक्षित रहे. इसके बाद सांसद व विधायक लोगों के साथ मांदर की थाप झूमे. मौके पर पंच सदस्य दिव्या भोक्ता, सुनीता देवी, इमिलदा देवी, चनेश्वर भोक्ता, समोध भोक्ता, कड़क सिंह, शिवदयाल भोक्ता, जिला सांसद प्रतिनिधि विनय सिंह, विधायक प्रतिनिधि मिथिलेश सिंह, जितेंद्र कुमार शौंडिक, मंडल अध्यक्ष दिलेश्वर भोक्ता, गंदौरी साव, लवकुश गुप्ता, मुखिया भरत यादव, अनिता देवी, मनोज यादव, बिनोद यादव, दिव्या भोक्ता समेत कई लोग शामिल थे.
सिमरिया के इलेवन स्टार मैदान में सरहुल महोत्सव
सिमरिया. प्रखंड मुख्यालय के इलेवन स्टार फुटबॉल मैदान में प्रकृति पर्व सरहुल हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. सरना समिति द्वारा आयोजित सरहुल महोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में बीडीओ चंद्रदेव प्रसाद व थाना प्रभारी सूर्य प्रताप सिंह शामिल हुए. दोनों ने संयुक्त रूप से कार्यक्रम का शुभारंभ किया. इसके पहले पाहनों ने जल वर्षा कर सखुआ के वृक्ष की विधिवत पूजा-अर्चना की. बीडीओ ने कहा कि सरहुल प्रकृति पर्व है. पूर्वजों के समय से इस पर्व को लोग मनाते आ रहे हैं. थाना प्रभारी ने कहा कि सरहुल हमलोगों को पेड़-पौधों की रक्षा करने की सीख देता है. उन्होंने लोगों को पेड़-पौधों को संरक्षित रखने का संकल्प दिलाया. समिति के सोमर उरांव और सचिव छोटू सिंह भोगता ने कहा कि आदिवासी जिस तरह घर की पूजा करते हैं, वैसे ही सरहुल की भी पूजा की जाती है. कार्यक्रम के बाद भव्य शोभायात्रा निकाली गयी. शोभायात्रा कार्यक्रम स्थल से निकलकर सुभाष चौक होती हुई प्रखंड कार्यालय तक गयी, वहां से पुन: कार्यक्रम स्थल पहुंची. इस दौरान रास्ते में लोग मांदर की थाप पर जम कर थिरके और गुलाल अबीर उड़ाये. मौके पर समिति के सरजू उरांव, महेश उरांव, दिलीप उरांव, बीरेंद्र उरांव, बाबूलाल भोगता, कर्मदेव उरांव, कुलेश्वर उरांव, संतोष उरांव, विष्णु उरांव, धर्मेंद्र उरांव, अनिल उरांव, सोनू उरांव, अनुज उरांव, मंजू उरांव, उर्मिला उरांव, कुलरंजन एक्का, बहादुर उरांव सहित आदिवासी समाज के लोग बड़ी संख्या में शामिल थे.
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