चतरा. सदर थाना परिसर स्थित सरकारी आवास से नाबालिग बालिका को बालिका गृह भेजे जाने के मामले में नया मोड़ सामने आया है. नाबालिग की मां ने डीसी रवि आनंद और एसपी अनिमेष नैथानी को आवेदन देकर बेटी को वापस दिलाने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है.
महिला थाना प्रभारी के घर करती थी घरेलू काम
आवेदन में मां ने बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) पर बेटी को जबरन अपने संरक्षण में रखने और वापस नहीं करने का आरोप लगाया है. नाबालिग की मां के अनुसार, वह महिला थाना प्रभारी के घर में घरेलू काम करती थी. उसकी बेटी कुछ समय से इधर-उधर घूमती रहती थी. इसके बाद मां की अनुमति से उसने बेटी को महिला थाना प्रभारी के घर के आसपास रहने के लिए छोड़ दिया था.
बेटी से मिलने के लिए भटकती रही मां
आरोप है कि 23 अगस्त की शाम उसकी बेटी को घर से बाहर ले जाया गया और बाद में बालिका गृह भेज दिया गया. मां का कहना है कि अगले दिन जब वह बेटी से मिलने पहुंची, तो उसे मुलाकात के लिए काफी परेशानी हुई. आरोप है कि उसे काफी देर तक इधर-उधर भेजा गया और बाद में कुछ समय के लिए बेटी से मिलने दिया गया. मां ने दावा किया कि उसकी बेटी को जबरन बालिका गृह में रखा गया है. उसने आशंका जतायी है कि बच्ची को किसी गलत तरीके से फंसाया या इस्तेमाल किया जा रहा है.
महिला थाना प्रभारी व पति निलंबित
मालूम हो कि सीडब्ल्यूसी द्वारा नाबालिग को संरक्षण में लेकर पकरिया स्थित बालिका आश्रय गृह भेजे जाने के बाद एसपी ने महिला थाना प्रभारी फिरदौस नाज और उनके पति एसआइ टीपू अंसारी को निलंबित कर दिया है. दोनों पर नाबालिग से घरेलू काम कराने, मारपीट और प्रताड़ित करने के आरोप लगे थे. हालांकि दोनों ने आरोपों को निराधार बताते हुए इसे साजिश कर छवि धूमिल करने का प्रयास बताया है. इस संबंध में सीडब्ल्यूसी के चेयरमैन नर्मदेश्वर सिंह से पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया.
