मो तसलीम
Chatra: पूर्व केंद्रीय मंत्री सह चतरा के पूर्व सांसद नागमणि को 12 वर्ष पुराने आदर्श आचार संहिता उल्लंघन मामले में न्यायालय से बड़ी राहत मिली है. प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी इदित होरो अदालत ने साक्ष्य के अभाव में उन्हें बरी कर दिया. मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से आठ गवाहों की गवाही कराई गई, लेकिन आरोप सिद्ध नहीं हो सका. जानकारी के अनुसार इटखोरी थाना कांड संख्या 20/14 के तहत तत्कालीन बीडीओ जयशेरवी मुर्मू ने 23 मार्च 2014 को मामला दर्ज कराया था.
2024 में नागमणि को किया गया था गिरफ्तार
नागमणि पर आरोप था कि लोकसभा चुनाव के दौरान लागू आदर्श आचार संहिता के बीच चतरा लोकसभा प्रत्याशी नागमणि ने 19 मार्च 2014 को इटखोरी स्थित मां भद्रकाली मंदिर परिसर में सभा को संबोधित किया था. इसी आरोप में उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था. बता दें कि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान इसी मामले में न्यायालय के आदेश पर नागमणि को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था. इसके बाद यह मामला राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया था.
नागमणि को कोर्ट पर पूरा भरोसा
न्यायालय से बरी होने के बाद नागमणि ने फैसले पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें शुरू से ही न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और आखिरकार सत्य की जीत हुई है. उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में मामला दर्ज हुआ था, लेकिन उन्हें इसकी जानकारी नहीं दी गई. वह लगातार चतरा आते-जाते रहे, इसके बावजूद उन्हें नोटिस या वारंट की जानकारी नहीं मिली. उन्होंने कहा कि एक साजिश के तहत 2024 के लोकसभा चुनाव में नामांकन के दौरान उन्हें गिरफ्तार कराया गया, जिसके कारण उन्हें चुनावी नुकसान उठाना पड़ा.
नागमणि ने लगाया आरोप
उन्होंने दावा किया कि जेल जाने की वजह से ही वह चुनाव हार गए. नागमणि ने कहा कि यह मामला पूरी तरह राजनीतिक रूप से प्रेरित था. न्यायालय के फैसले ने साबित कर दिया है कि आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य नहीं थे. उन्होंने कहा कि न्यायालय ने उन्हें न्याय दिया है और वह आगे भी अपनी राजनीतिक लड़ाई जारी रखेंगे. साथ ही उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोधियों को जनता के बीच जवाब दिया जाएगा.
मौके पर अधिवक्ता निर्मल कुमार दांगी, विनीत रंजन एवं चंदन कुमार उपस्थित थे. वहीं दिनेश दांगी, अशोक दांगी, अभय दांगी समेत कई समर्थकों ने न्यायालय के फैसले पर खुशी जाहिर की और इसे सत्य की जीत बताया.
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