जगन्नाथपुर/चाईबासा.
पश्चिमी सिंहभूम जिले के टोंटो प्रखंड स्थित सेरेंगसिया घाटी के शहीद स्मारक पर सोमवार को कोल विद्रोह के शहीदों को श्रद्धांजलि दी गयी. सेरेंगसिया गांव के दिउरी ने परिसर के शुद्धीकरण के बाद शहीद स्मारक पर आदिवासी हो रीति से मुर्गे की बलि देकर पूजा-अर्चना की. करीब 12 बजे आम लोगों के लिए शहीद स्मारक का मुख्य द्वार खोला गया. सरायकेला-खरसावां जिला, जमशेदपुर व अन्य जगहों के दिउरी समाज ने परंपरागत वेशभूषा व हथियार तीर-धनुष धारण कर तथा तीर-धनुष गाड़ कर पूजा की. कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि अंग्रेजों के खिलाफ महासंग्राम में शहादत देने वाले वीर महानायकों को शत- शत नमन है. हमारे पूर्वजों ने अपनी पहचान, जल-जंगल- जमीन की रक्षा और अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष में अपना सबकुछ न्योछावर कर दिया था. आदिवासी जब तक आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक और बौद्धिक रूप से मजबूत नहीं होंगे, तब तक आगे नहीं बढ़ेंगे.शहीदों के आदर्शों और सपनों को पूरा करने का संकल्प लें
सीएम ने कहा कि आज का दिन हम सभी के लिए काफी महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक है. हमें अमर वीर शहीदों के आदर्शों और सपनों को पूरा करने का संकल्प लेना है. झारखंड शूरवीरों की धरती है. हम साल भर किसी ना किसी वीर शहीद का शहादत दिवस मनाते हैं. जब देश में आजादी की लड़ाई शुरू नहीं हुई थी, उस वक्त हमारे पूर्वजों ने अंग्रेजों से लोहा लिया. कोल्हान का कोल विद्रोह इतिहास के पन्नों में दर्ज है.
